इस महीने के अंत में अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक होने वाली है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर इसमें शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों की अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात भी तय हो सकती है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ट्रंप और पाकिस्तानी नेतृत्व की बार-बार मुलाकातों के पीछे क्या राज़ छिपा है।
ट्रंप-पाकिस्तान मुलाकात पर चर्चा तेज
अब तक मुनीर और ट्रंप की दो मुलाकातें हो चुकी हैं। अगर इस बार बातचीत होती है, तो यह तीसरी सीधी बैठक होगी। हैरानी की बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में आमतौर पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या विदेश मंत्री हिस्सा लेते हैं, न कि किसी देश के सेना प्रमुख। ऐसे में मुनीर की मौजूदगी नए संकेत देती है।
भारत को लेकर नई रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप, शरीफ और मुनीर की मुलाकात भारत पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। बहावलपुर आतंकी हमले, पाकिस्तान में आई बाढ़ और कतर पर इजरायली हमलों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा संभव है। उधर, प्रधानमंत्री मोदी इस बार UNGA में नहीं जाएंगे, लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
मोदी-ट्रंप फोन कॉल भी सुर्खियों में
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में भारत की भूमिका की तारीफ की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मोदी “बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।” इसे भारत-अमेरिका संबंधों को सुधारने की दिशा में अहम संदेश माना जा रहा है।
कूटनीतिक समीकरण बदलते हुए
विश्लेषकों के मुताबिक, बार-बार ट्रंप, शरीफ और मुनीर की बैठकें दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण बदलने का संकेत हैं। ऐसे समय में जब रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट दुनिया का ध्यान खींचे हुए हैं, भारत के खिलाफ कोई नई साजिश तैयार होना बड़ी चिंता का विषय हो सकता है।
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