इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच मंगलवार (14 अप्रैल) को महत्वपूर्ण टेलीफोनिक वार्ता हुई। इस बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालातों पर विस्तार से चर्चा की गई। खासतौर पर ईरान, लेबनान और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को लेकर दोनों नेताओं ने अपने विचार साझा किए। इस संवाद की जानकारी गिदोन सार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए सार्वजनिक की।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख
गिदोन सार ने बातचीत के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वैश्विक सुरक्षा बनाए रखने के लिए ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस दिशा में अमेरिका की स्पष्ट और सख्त नीति पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में है। सार के अनुसार, ईरान में संवर्धन गतिविधियों पर रोक और संवर्धित सामग्री को हटाना आवश्यक कदम हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा पर चिंता
इजरायली विदेश मंत्री ने होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से उत्पन्न बाधाएं वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक हैं। ऐसे में जरूरी है कि सभी देशों के व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाएं। इस मुद्दे का असर भारत और खाड़ी देशों के व्यापार पर भी पड़ सकता है।
कुवैत और सिंगापुर से भी हुई चर्चा
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कुवैत और सिंगापुर के विदेश मंत्रियों के साथ भी बातचीत की थी। कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा के साथ चर्चा में वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। जयशंकर ने इसे एक सार्थक संवाद बताया।
सोशल मीडिया के जरिए दी गई जानकारी
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन के साथ उनकी बातचीत पश्चिम एशिया के हालात और उसके वैश्विक प्रभावों पर केंद्रित रही। उन्होंने कहा कि इस तरह की चर्चाएं मौजूदा संकट को समझने और उससे निपटने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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