नीम करोली बाबा के प्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ ने पहाड़ी क्षेत्रों की वहन क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘हनुमान अंश’ फिल्म की सफलता के बाद यहां भक्तों की संख्या बढ़ी है, जबकि NIUA के शोध ने बुनियादी ढांचे और पर्यावरण पर बढ़ते दबाव को उजागर किया है।
कैंची धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम
नीम करोली बाबा के प्रसिद्ध कैंची धाम में ‘हनुमान अंश’ फिल्म की सफलता के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। खासकर शनिवार और रविवार को मंदिर से मुख्य मार्ग तक भारी भीड़ रहती है। बीते वीकेंड दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य क्षेत्रों से आए लोग घंटों जाम में फंसे। इसका असर अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की ओर जाने वाले यात्रियों पर भी पड़ा। उत्तराखंड पुलिस ने यातायात सामान्य किया, लेकिन भीड़ का दबाव स्थायी चुनौती बनता जा रहा है।
क्या है किसी क्षेत्र की कैरिंग कैपेसिटी?
कैरिंग कैपेसिटी का अर्थ उस क्षमता से है, जिसे कोई क्षेत्र प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचाए बिना संभाल सकता है। इसमें पेयजल, सीवेज, कचरा निस्तारण, पार्किंग और सड़क जैसी सुविधाएं शामिल हैं। क्षमता से अधिक दबाव पड़ने पर व्यवस्था प्रभावित होती है।
NIUA की रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) के नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों की वहन क्षमता संबंधी अध्ययन, जिसे स्प्रिंगर नेचर ने प्रकाशित किया है, के अनुसार केवल भूमि क्षेत्रफल के आधार पर नैनीताल रोजाना 8.34 लाख लोगों को संभाल सकता है। पहाड़ों की संवेदनशीलता, बारिश और लैंडस्लाइड जोखिम जोड़ने पर यह क्षमता 1.49 लाख प्रतिदिन रह जाती है। सीवेज, कचरा, पेयजल और पार्किंग को शामिल करने पर वास्तविक क्षमता केवल 8,422 लोग प्रतिदिन पाई गई।
पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर बढ़ता दबाव
क्षमता से अधिक दबाव से आपदा के दौरान नुकसान बढ़ने, भूस्खलन और जल संकट की आशंका बढ़ती है। कचरे और प्लास्टिक से नाले, जंगल और नदियां प्रभावित हो रहे हैं, जिससे जैव विविधता और वन्यजीवों के आवास पर असर पड़ रहा है।
उत्तराखंड में वाहनों की बढ़ती आवाजाही
ANPR आंकड़ों के अनुसार 2 अक्टूबर को 1,01,840, 3 अक्टूबर को 94 हजार और 4 अक्टूबर को लगभग 90 हजार बाहरी वाहन राज्य में आए। स्थानीय वाहनों को मिलाकर इन दिनों कुल आवाजाही क्रमशः 1,60,000 से अधिक, 1,57,000 और लगभग 1,47,000 वाहन रही।
10 बड़े पॉइंट: खबर का सार
- कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी।
- ‘हनुमान अंश’ फिल्म की सफलता के बाद भीड़ बढ़ी।
- वीकेंड पर मंदिर और मुख्य मार्ग पर भारी भीड़ रहती है।
- जाम का असर अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जाने वाले यात्रियों पर पड़ा।
- NIUA ने नैनीताल की वहन क्षमता का अध्ययन किया।
- भूमि क्षेत्र के आधार पर क्षमता 8.34 लाख प्रतिदिन बताई गई।
- संवेदनशीलता और आपदा जोखिम जोड़ने पर क्षमता 1.49 लाख रह गई।
- बुनियादी सुविधाओं के आधार पर वास्तविक क्षमता 8,422 प्रतिदिन पाई गई।
- अधिक दबाव से पर्यावरण और जैव विविधता प्रभावित हो रही है।
- 2 से 4 अक्टूबर के बीच बाहरी और स्थानीय वाहनों की भारी आवाजाही दर्ज हुई।
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