पश्चिम बंगाल में मतदान में अब महज 22 दिन बाकी हैं, लेकिन राज्य के कई इलाकों में राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। खासकर फॉर्म-6 को लेकर विवाद ने जमीनी स्तर पर टकराव को और तेज कर दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले और धार्मिक भावनाओं से जुड़े आरोपों के बीच स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर टकराव
राजधानी कोलकाता में 1 अप्रैल को फॉर्म-6 जमा करने की अंतिम तारीख के चलते मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर भारी भीड़ जुटने की आशंका है। प्रशासन को डर है कि एक बार फिर अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है।
दरअसल, 31 मार्च को इसी स्थान पर टीएमसी और बीजेपी समर्थकों के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मेदिनीपुर से आए एक व्यक्ति को बैग के साथ चुनाव आयोग कार्यालय में प्रवेश करते देखा गया। टीएमसी कार्यकर्ताओं को शक हुआ कि बैग में बड़ी संख्या में भरे हुए फॉर्म-6 मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर मतदाता सूची में हेरफेर के लिए किया जा सकता है।
इस संदेह के आधार पर उस व्यक्ति को रोका गया और उसके साथ कथित रूप से बदसलूकी की गई। वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति का पार्टी से कोई संबंध नहीं है और वह निजी काम से वहां आया था।
दोनों पक्षों का विरोध प्रदर्शन
घटना के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर धरना देते हुए टीएमसी पर दबाव बनाने और हिंसा करने का आरोप लगाया। वहीं टीएमसी समर्थकों ने भी फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
क्या है फॉर्म-6?
फॉर्म-6 भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसका उपयोग नए मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में जोड़ने या स्थान परिवर्तन की स्थिति में विवरण अपडेट करने के लिए किया जाता है। चुनावी प्रक्रिया में इसकी अहम भूमिका होती है।
टीएमसी का बड़ा आरोप
टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि फॉर्म-6 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर “मतदाता चोरी” की कोशिश की जा रही है।
उनका कहना है कि हजारों आवेदन ऐसे लोगों के नाम से दाखिल किए गए हैं, जिनका राज्य के वास्तविक मतदाताओं से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इस मामले में वीडियो जारी कर चुनाव आयोग से जवाब भी मांगा है।
चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में फॉर्म-6 को लेकर बढ़ता विवाद राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और चुनाव आयोग इस स्थिति को कैसे नियंत्रित करते हैं।
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