रुद्रपुर। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया के निर्देशन में उत्तराखण्ड सेवा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु सोमवार को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सभागार, कलेक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय की अध्यक्षता आयोजित हुई। बैठक में ओ.सी. कलेक्ट्रेट गौरव पांडे ने अवगत कराया कि आमजन को त्वरित, निष्पक्ष एवं पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य में उत्तराखण्ड सेवा का अधिकार आयोग का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि यद्यपि अधिनियम में समयबद्धता निर्धारित की गई है, फिर भी कुछ विभागों द्वारा निर्धारित समय पर रिपोर्ट प्रेषित नहीं की जा रही है, जिससे शासन को समय पर रिपोर्ट भेजने में विलंब हो रहा है। उन्होंने समस्त विभागों को प्रत्येक माह की 3 तारीख तक अनिवार्य रूप से सेवा का अधिकार रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिए। साथ ही, जिन विभागों की रिपोर्ट शून्य होती है, उन्हें भी निर्धारित समय में शून्य रिपोर्ट भेजने को कहा गया।
सेवाओं के निस्तारण में किसी प्रकार की जल्दबाजी से बचा जाए
अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सेवा का अधिकार अधिनियम के कुशल क्रियान्वयन हेतु प्रत्येक विभाग द्वारा साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित की जानी चाहिए, ताकि उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेवाओं के निस्तारण में किसी प्रकार की जल्दबाजी से बचा जाए तथा यदि कोई प्रकरण अस्वीकार करना हो तो उसका समुचित कारण दर्ज किया जाए।
अपर जिलाधिकारी ने कहा कि अधिनियम के अंतर्गत लंबित सभी प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण अनिवार्य है, साथ ही जो सेवाएं अधिनियम के अंतर्गत नहीं आतीं, उनके भी समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में सेवाओं का निस्तारण नहीं होता है तो आयोग द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। बैठक में अनुपस्थित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी अपर जिलाधिकारी द्वारा दिए गए।
इसे भी पढ़े-महाराष्ट्र संकट पर बड़ा फैसला, अब 5 जजों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए




