मिडिल ईस्ट एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच आज होने वाली तीसरे और निर्णायक दौर की वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। अगर यह बातचीत असफल रही, तो क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर ईरान के लिए आज का दिन बेहद निर्णायक माना जा रहा है।
जिनेवा में होगी निर्णायक बातचीत
अमेरिका और ईरान के बीच यह अहम वार्ता स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर में ओमान की मध्यस्थता से आयोजित की जा रही है। बातचीत में ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम, लगाए गए प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होगी। ईरान की ओर से विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची और अमेरिका की तरफ से विशेष दूत जेरेड कुशनर वार्ता की मेज पर मौजूद रहेंगे।
वार्ता से पहले अमेरिका की ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’
बातचीत शुरू होने से ठीक पहले अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंधों का ऐलान कर माहौल और तनावपूर्ण बना दिया है। इसे कूटनीतिक दबाव के साथ-साथ युद्ध की चेतावनी के तौर पर भी देखा जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने भी किसी तरह के दबाव में झुकने से इनकार कर दिया है।
ईरान का बयान: ‘न्यायसंगत समझौते के इरादे से आएंगे’
जिनेवा रवाना होने से पहले ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने को तैयार है और वह “न्यायपूर्ण व समान समझौते” के लक्ष्य के साथ वार्ता में हिस्सा लेंगे।
ट्रंप की चेतावनी और जंगी तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि अगर इस बार समझौता नहीं हुआ, तो इसके “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं। इस बयान को सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी माना जा रहा है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान के आसपास सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, अतिरिक्त सैनिक, निगरानी विमान और युद्धपोत तैनात किए जा चुके हैं, जिससे हालात और विस्फोटक बन गए हैं।
ईरान का जवाबी शक्ति प्रदर्शन
वार्ता से पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने रणनीतिक रूप से अहम हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। इसके अलावा ईरान ने कोरम क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती भी की है।
वैश्विक असर तय
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आज की वार्ता बेनतीजा रही, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और विश्व अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। आज होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता मिडिल ईस्ट के भविष्य की दिशा तय कर सकती है। समझौता हुआ तो तनाव कम होगा, लेकिन असफलता की स्थिति में दुनिया एक और बड़े युद्ध के करीब पहुंच सकती है। अगले कुछ घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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