पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आम जनता के बाद अब पुलिसकर्मियों ने भी पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। सोमवार को मुजफ्फराबाद में सैकड़ों पुलिसकर्मी वर्दी में ही बैनर-पोस्टर लेकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने ड्यूटी करने से इनकार करते हुए जमीयत-ए-पुलिस कश्मीर के बैनर तले अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की और सरकार के सामने 12 सूत्रीय मांगें रखीं।
मृतक पुलिसकर्मियों के परिवारों को नहीं मिलता हक़
हड़ताल कर रहे पुलिसकर्मियों ने आरोप लगाया कि पाक सरकार PoK में पुलिस बल के साथ भेदभाव करती है। मृतक पुलिसकर्मियों के परिवारों को न तो उनकी जमा राशि दी जाती है और न ही पेंशन में कोई बढ़ोतरी होती है। पंजाब प्रांत में पुलिस के परिजनों को बेहतर सुविधाएं दी जाती हैं, जबकि PoK में उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।
सरकारी अस्पतालों में भी भेदभाव
PoK पुलिसकर्मियों का कहना है कि क्षेत्र के बड़े सरकारी अस्पतालों में केवल सेना के अधिकारी और उनके परिवार इलाज के पात्र होते हैं। पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों को न तो प्राथमिकता दी जाती है और न ही बाहर इलाज कराने पर खर्च की प्रतिपूर्ति की जाती है। उन्होंने मांग की कि उन्हें भी सेना जैसी सुविधाएं मिलें।
अन्य भत्तों की मांग
हड़ताली पुलिसकर्मियों ने कहा कि यूनिफॉर्म भत्ता, रिस्क अलाउंस, डिसपेरिटी अलाउंस और महंगाई को ध्यान में रखकर अन्य भत्तों में वृद्धि की जाए। उन्होंने 2022 के वेतन स्केल के हिसाब से लाभ देने की मांग की।
PoK में बढ़ रहा असंतोष
पुलिसकर्मियों के साथ-साथ राजस्व विभाग के कर्मचारी भी सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। वे चेतावनी दे चुके हैं कि अगर बराबरी का हक़ न मिला तो 3 अगस्त से पूर्ण हड़ताल करेंगे। PoK में लगातार विरोध प्रदर्शनों से सरकार की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
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