सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच अमेरिका ने अपने दूतावास के गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। ट्रंप प्रशासन का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब में एयरपोर्ट, तेल सुविधाओं और नागरिक ढांचे को निशाना बना रहे हैं। बुधवार को हुए ताजा हमलों में तीन लोगों की मौत हुई है। इन घटनाओं से मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
दूतावास के कर्मचारियों को देश छोड़ने का निर्देश
समाचार एजेंसी AFP ने इससे पहले एक राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया था कि खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी दूतावास के सभी अमेरिकी कर्मचारियों और उनके परिवारों को वहां से जाने का आदेश दिया गया है। सूत्र के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, कतर और बहरीन में तैनात कर्मचारियों के परिवारों को भी देश छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने की फैसले की पुष्टि
बाद में अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कर्मचारियों को हटाने के आदेश की पुष्टि की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्देश केवल सऊदी अरब में मौजूद उन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों पर लागू होता है, जिनकी वहां तत्काल उपस्थिति आवश्यक नहीं है।
पिगॉट ने सऊदी अरब के बाहर स्थित अमेरिकी राजनयिक मिशनों में किसी बदलाव को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कर्मचारियों को हटाने के फैसले के पीछे हूती विद्रोहियों द्वारा आम नागरिकों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों का हवाला दिया। अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा, “विभाग के कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा तनाव
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष तेज हो गया है। इस महीने हूती बलों ने सऊदी अरब पर लगभग रोजाना हमले किए हैं। इनमें रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ हमला भी शामिल है, जिसे पिछले कुछ वर्षों में देश पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक बताया गया है।
शायबाह तेल सुविधा पर ड्रोन हमला
बुधवार को सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि शायबाह तेल सुविधा को निशाना बनाने वाले ड्रोन को मार गिराया गया। हालांकि, ड्रोन का मलबा गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए।
इन हमलों में दम्माम के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और तेल सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं भी शामिल हैं। लगातार बढ़ते हमलों और अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने के फैसले ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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