दिल्ली के लाल किले के पास हुए तेज धमाके ने पूरे देश को दहला दिया। शुक्रवार की शाम अचानक हुए इस धमाके से पूरा इलाका थर्रा उठा। पुलिस, एनएसजी और एनआईए की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। चारों ओर सायरनों की आवाज़ें, धुएं का गुबार और लोगों में अफरातफरी का माहौल था। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ हो सकता है।
मुस्लिम देशों ने भारत के साथ दिखाया एकजुटता का भाव
इस हमले के बाद दुनिया के कई मुस्लिम देशों ने भारत के प्रति संवेदना जताई और आतंकवाद की निंदा की। कतर, मालदीव, मलेशिया, यूएई और ईरान जैसे देशों ने स्पष्ट कहा कि वे इस मुश्किल समय में भारत के साथ हैं। लेकिन सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बयान आया सऊदी अरब से—जिसने न केवल दिल्ली धमाके की कड़ी निंदा की, बल्कि भारतीय नागरिकों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
पाकिस्तान-सऊदी रिश्तों पर उठे सवाल
सऊदी अरब का यह कदम पाकिस्तान के लिए करारा झटका माना जा रहा है। दरअसल, पाकिस्तान खुद को सऊदी का “इस्लामी भाई” कहता आया है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की ऐतिहासिक साझेदारी रही है। लेकिन रियाद ने इस बार पाकिस्तान की बजाय भारत के साथ खड़े होकर साफ संकेत दिया है कि उसका रुख अब बदल रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि इस्लामाबाद में धमाके की खबर आने के बावजूद सऊदी अरब ने उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पाकिस्तान ने उम्मीद की थी कि रियाद इस घटना पर उसके समर्थन में बयान देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे यह साफ है कि सऊदी अरब अब पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़ी छवि से दूरी बनाना चाहता है।
भारत की सख्त प्रतिक्रिया और जांच तेज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। एनआईए और दिल्ली पुलिस की विशेष टीमें जांच में जुटी हैं। सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा रहा है ताकि हमले की साजिश रचने वालों को जल्द पकड़ा जा सके।
सऊदी अरब का यह समर्थन भारत के लिए राजनयिक दृष्टि से बड़ा अवसर है, जबकि पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश—“संकट में वही साथ देता है जो सच्चा मित्र होता है।”
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