देहरादून। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल का नाम इस विवाद में आने के बाद राज्य सरकार ने सख्ती दिखाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गहन जांच के आदेश देते हुए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन कर दिया है।
कैसे सामने आया मामला?
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर दर्ज किए गए आवेदनों में सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल, किच्छा का नाम सामने आया, जबकि यह अल्पसंख्यक विद्यालय नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इस स्कूल में 154 मुस्लिम बच्चों के नाम दर्ज हैं और संचालक मोहम्मद शारिक-अतीक बताया गया है। इस खुलासे के बाद सीएम धामी ने जांच के निर्देश दिए।
एसआईटी को मिली जिम्मेदारी
जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक (लॉ एंड ऑर्डर) डॉ. निलेश भरणे के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है। इसमें हर जिले के एसपी, पीएचक्यू के डीएसपी और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल किए गए हैं।
अन्य संस्थानों पर भी नजर
जांच सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है। काशीपुर के नेशनल अकादमी में 125 मुस्लिम बच्चों और मदरसा अल जामिया उल मदरिया, मदरसा अल्बिया रफीक उल उलूम, मदरसा जामिया आलिया और मदरसा जामिया रजा उल उलूम के छात्रों के आवेदनों की भी जांच की जा रही है। इन संस्थानों में सैकड़ों बच्चों के नाम संदिग्ध पाए गए हैं।
सरकार का रुख सख्त
सीएम धामी ने कहा, “राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल में दर्ज जानकारी संदेहजनक है। सरकार चाहती है कि जांच जल्द पूरी हो और दोषियों पर कार्रवाई हो।” अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने भी पुष्टि की कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और केंद्र सरकार से संवाद जारी है।
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