जब भी हम “उड़ने वाले सांप” का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में किसी डरावने, खतरनाक और जहरीले सांप की तस्वीर उभर आती है। लेकिन हकीकत में ये सांप उतने भयानक नहीं होते जितना नाम सुनकर लगता है। इस प्रजाति का वैज्ञानिक नाम क्राइसोपेलिया (Chrysopelea) है। ये सांप दक्षिण-पूर्व एशिया के घने जंगलों में पाए जाते हैं और अपने अनोखे तरीके से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में “फिसलते” या “उड़ते” हैं।
क्या उड़ने वाले सांप जहरीले होते हैं?
उड़ने वाले सांपों को हल्का जहरीला माना जाता है। ये अपने छोटे शिकार जैसे छिपकली, मेंढक और पक्षियों को लकवाग्रस्त करने के लिए जहर का उपयोग करते हैं। इनमें मौजूद जहर न्यूरोटॉक्सिन प्रकार का होता है जो केवल छोटे जीवों के तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। मानव शरीर पर इसका प्रभाव बेहद हल्का होता है — अधिकतर मामलों में केवल हल्की लालिमा, सूजन या दर्द महसूस होता है।
इंसानों पर असर क्यों नहीं होता?
इन सांपों के दांत मुंह के पिछले हिस्से में होते हैं, जिससे इंसान की त्वचा में जहर प्रभावी रूप से पहुंच ही नहीं पाता। अब तक किसी वैज्ञानिक अध्ययन या वन्यजीव रिकॉर्ड में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं है कि उड़ने वाले सांप के काटने से किसी इंसान की मौत हुई हो। यहां तक कि बच्चों पर भी इसका जहर जानलेवा साबित नहीं होता।
उड़ने वाले सांप भले ही दिखने में डरावने लगते हों, लेकिन असल में ये इंसानों के लिए पूरी तरह निर्दोष (हार्मलेस) हैं। इनके काटने से किसी तरह का गंभीर खतरा नहीं होता। अगर कभी यह काट भी लें, तो बस हल्की एलर्जी या सूजन की संभावना रहती है। इसलिए अगली बार जब आप “उड़ने वाले सांप” के बारे में सुनें, तो डरिए मत — ये प्रकृति का एक अनोखा लेकिन सुरक्षित चमत्कार हैं।
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