खबर संसार देहरादून सौरभ त्यागी। भू कानून पर कांग्रेस भाजपा का स्टैंड क्यों नही है क्लियर! जी हा सच है क्योंकि दोनो ही दल उत्तराखंड में महत्पूर्ण है क्योंकि दोनो का दबदबा और वोट बैंक है।लेकिन इन दिनों ही महत्पूर्ण दलों का भू कानून को लेकर स्पष्ट स्टैंड नही है हालाकि इनके नेता इस बारे में बात तो कर रहे है।
बताते चले की उत्तराखंड का कुल भूभाग यानी क्षेत्रफल 53483 वर्ग किलोमीटर है जिसमे अधिकांश भाग यानी पहाड़ी एरिया 92 प्रतिशत है। जबकि मैदानी क्षेत्रफल 8 प्रतिशत है। पूरे उत्तराखंड में अधिकांश भाग वन भूमि का है यानी 65 प्रतिशत फॉरेस्ट लैंड है। इस 65 प्रतिशत फॉरेस्ट लैंड में 40 प्रतिशत एरिया में जंगल है। इस 25 प्रतिशत एरिया में धीरे धीरे कब्जा होता जा रहा है। इसका सरकार चाहे तो खेती किसानी में उपयोग कर सकती है लेकिन इस दिशा में सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है।
बाहरी व्यक्ति उत्तराखंड में भूमि ना खरीदे या कितना खरीदे को लेकर 2002 में एनडी सरकार ने इसकी सीमा 500 वर्ग मीटर रखी थी। 2007 में खंडूरी सरकार ने इसकी सीमा 250 वर्ग मीटर कर दी थी। की इससे ज्यादा भूमि बाहरी लोग उत्तराखंड में भूमि नही खरीद सकते।
भाजपा की और से पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत भी कई बार भू कानून की अवश्यकता पर सवाल उठा चुके है। तो कांग्रेस से हरीश रावत भी लगातार भू कानून की पैरवी करते आए है। लेकिन पार्टी स्तर पर दोनो दलों का फंडा क्लियर नही है। इधर यूकेडी और आप इस मुद्दे को जरूर पकड़े हुए है हालाकि यूकेडी पहले से ही स्टैंड क्लियर कर रखा है की बाहरी व्यक्तियों को उत्तराखंड में जमीन नहीं खरीदने देंगे। तो आप पार्टी भी इस मुद्दे को अब उठा रही।



