भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते के बाद रूसी कच्चे तेल (Crude Oil) को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई है। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने 3 फरवरी 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अगर भारत पूरी तरह रूसी तेल की खरीद बंद करता है, तो इसका सीधा असर आर्थिक विकास, महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
भारत तुरंत रूसी तेल से दूरी नहीं बनाएगा: मूडीज
मूडीज के मुताबिक भारत ने हाल के महीनों में रूस से तेल आयात जरूर घटाया है, लेकिन एकदम से सभी खरीद रोकना व्यावहारिक नहीं होगा। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और रूसी तेल सस्ता होने के कारण उसकी ऊर्जा जरूरतों में अहम भूमिका निभाता है। अचानक बदलाव से वैश्विक सप्लाई और ज्यादा टाइट हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ेंगी।
अमेरिका का दावा, भारत की चुप्पी
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और वेनेजुएला से ज्यादा तेल लेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से ज्यादा का सामान खरीदेगा, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र भी शामिल है।
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयान में केवल टैरिफ कटौती की बात कही और रूसी तेल का कोई जिक्र नहीं किया।
व्हाइट हाउस का बयान बनाम मूडीज का आकलन
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि रूस से तेल खरीद पर लगाया गया 25 प्रतिशत पेनाल्टी टैरिफ हटा लिया गया है और भारत ने खरीद बंद करने पर सहमति दी है। लेकिन मूडीज का मानना है कि भारत इस फैसले को धीरे-धीरे लागू करेगा, ताकि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को नुकसान न पहुंचे।
शेयर बाजार और व्यापार को फायदा
इस समझौते से रत्न-आभूषण, कपड़ा और परिधान जैसे सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। घोषणा के बाद शेयर बाजार में तेजी दिखी, निफ्टी करीब 3 प्रतिशत चढ़ा और रुपया मजबूत होकर 90.40 प्रति डॉलर तक पहुंच गया।
आगे क्या करेगा भारत?
मूडीज का कहना है कि भारत रूस पर निर्भरता कम जरूर करेगा, लेकिन वैश्विक बाजार हालात देखकर बेहद सतर्क कदम उठाएगा। आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर और साफ तस्वीर सामने आ सकती है।
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