अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज डोनाल्ड ट्रंप सरकार के सबसे विवादित फैसलों में से एक पर ऐतिहासिक निर्णय सुना सकती है। मामला ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ से जुड़ा है, जिसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारत, चीन और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
कोर्ट यह तय करेगी कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत नेशनल इमरजेंसी घोषित कर टैरिफ लगाकर अपनी संवैधानिक सीमाएं लांघ दी थीं। अगर सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ को अवैध करार दिया, तो अमेरिका को 130 बिलियन डॉलर से ज्यादा रकम लौटानी पड़ सकती है।
कोर्ट का मूड क्या कहता है?
नौ जस्टिस की बेंच में से केवल तीन को ट्रंप का खुला समर्थक माना जाता है। बाकी जस्टिस पहले ही संकेत दे चुके हैं कि IEEPA कानून इतने व्यापक और सार्वभौमिक टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं देता। निचली अदालतें भी ट्रंप सरकार के खिलाफ फैसला दे चुकी हैं, जिससे आज के फैसले की अहमियत और बढ़ गई है।
ग्लोबल ट्रेड पर असर
इस फैसले का असर सिर्फ वाशिंगटन तक सीमित नहीं है। चीन से लेकर भारत तक ट्रेड पॉलिसी की दिशा इससे तय हो सकती है। यही वजह है कि वॉल स्ट्रीट के साथ-साथ एशियाई बाजारों में भी बेचैनी साफ नजर आई। निवेशक इस फैसले को भविष्य की ट्रेड रणनीति के लिए टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं।
ट्रंप की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप पहले ही इस फैसले को अपने लिए “जीने-मरने की लड़ाई” बता चुके हैं। उनका कहना है कि अगर टैरिफ रद्द हुए तो अमेरिका को सैकड़ों बिलियन डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी। इसी दलील के आधार पर उन्होंने इसे नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा बताया।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर है। आज का फैसला यह तय करेगा कि राष्ट्रपति की ताकत कानून से ऊपर है या संविधान की सीमा सब पर लागू होती है।
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