पिछला हफ्ता भारतीय आईटी सेक्टर के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। देश की टॉप-5 आईटी कंपनियों के मार्केट कैप से करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इसके पीछे कोई आर्थिक मंदी नहीं, बल्कि अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रोपिक का नया प्रोडक्ट Claude Cowork है। करीब 2,500 कर्मचारियों वाली इस कंपनी ने ऐसा एआई टूल पेश किया है, जिसने वैश्विक आईटी उद्योग के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्रैश हुए IT शेयर
Claude Cowork को 12 जनवरी को लॉन्च किया गया था। शुरुआत में बाजार पर इसका असर नहीं दिखा, लेकिन जैसे ही इसके 11 बिजनेस प्लग-इन सामने आए और ऑटोमेशन क्षमताओं की चर्चा बढ़ी, निवेशकों में घबराहट फैल गई।
5 फरवरी को TCS और Infosys के शेयर लगभग 7% तक टूट गए। अमेरिका में टेक कंपनियों के निवेशकों को एक हफ्ते में 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जबकि भारत में 1.5 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
क्या है Claude Cowork?
अब तक ChatGPT या Gemini जैसे चैटबॉट सवालों के जवाब देते थे या कंटेंट तैयार करते थे। लेकिन Claude Cowork इससे एक कदम आगे है। यह सिर्फ जानकारी नहीं देता, बल्कि सिस्टम से जुड़कर डिजिटल सहकर्मी की तरह काम करता है।
साधारण भाषा में समझें तो जहां सामान्य चैटबॉट फ्रीलांसर जैसा है, वहीं Cowork ऑफिस के जूनियर स्टाफ की तरह रोजमर्रा के काम संभालता है। यह कोडिंग, मार्केटिंग, लीगल और अकाउंटिंग जैसे कामों को ऑटोमेट कर सकता है।
SaaS कंपनियों पर संकट?
अमेरिका में SaaS (Software as a Service) कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञ इस स्थिति को ‘SaaS-pocalypse’ कह रहे हैं। निवेशकों को डर है कि यदि एआई खुद सॉफ्टवेयर बना और संभाल सकता है, तो सर्विस कंपनियों की जरूरत कम हो सकती है।
भारतीय IT कंपनियों पर ज्यादा असर क्यों?
भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा बिजनेस मॉडल सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस पर आधारित है। यहां घंटों के हिसाब से बिलिंग होती है और बड़ी संख्या में कर्मचारी इस प्रक्रिया में शामिल रहते हैं। अगर एआई टूल्स सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और मेंटेनेंस दोनों को ऑटोमेट करने लगें, तो इस मॉडल पर सीधा असर पड़ेगा। यही वजह है कि Claude Cowork को लेकर भारतीय आईटी सेक्टर में चिंता गहराती जा रही है।
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