Monday, September 16, 2024
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नवरात्रि का 7वां दिन मां कालरात्रि को है समर्पित, भय-शत्रु से मिलेगा छुटकारा

नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा की सातवीं शक्ति मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि दुष्टों के विनाश के लिए जानी जाती हैं। मां का यह स्वरूप भक्तों को शुभ फल प्रदान करती हैं। भक्तों को शुभ फल देने के लिए maa kaalaraatri को शुभंकरी भी कहा जाता है।

मां कालरात्रि तीन नेत्रों वाली देवी हैं। जो भी भक्त maa kaalaraatri की विधि-विधान से पूजा अर्चना करता है, उसके भय और रोगों का नाश होता है। maa kaalaraatri की पूजा से अकाल मृत्यु, रोग, भूत प्रेत, शोक आदि सभी प्रकार की परेशानियां भी समाप्त हो जाती हैं। आइए जानते हैं मां कालरात्रि का स्वरूप, पूजा विधि और मंत्र के बारे में…

मां कालरात्रि का स्वरूप

मान्यता के मुताबिक शुम्भ, निशुम्भ और रक्तबीज को मारने के लिए मां दुर्गा ने कालरात्रि का रूप लिया था। maa kaalaraatri का शरीर अंधकार की तरह काला है। मां के श्वास से आग निकलती है और गले में विद्युत की चमक वाली माला धारण करती हैं। उनके केश बड़े व बिखरे हुए हैं।

मां के तीन नेत्र ब्रह्माण्ड की तरह विशाल व गोल हैं, इनसे बिजली की तरह किरणें निकलती हैं। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं। जिनमें वह तलवार, लौह अस्त्र, अभय मुद्रा और वरमुद्रा धारण किए हुए हैं। पापियों का नाश करने के लिए मां दुर्गा ने ऐसा स्वरूप लिया। वह अपने भक्तों पर अनुकम्पा और कृपा बनाए रखती हैं।

पूजा विधि

  • शारदीय नवरात्रि के 7वें दिन सुबह स्नान करें।
  • फिर मां के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • maa kaalaraatri को लाल रंग के फूल अर्पित करें।
  • पूजा में मिष्ठान, पंच मेवा, अक्षत, धूप, गंध, पांच प्रकार के फल, पुष्प और गुड़ नैवेद्य आदि का अर्पित करें।
  • इस दिन गुड़ का विशेष महत्व है।
  • maa kaalaraatri को गुड़ या फिर इससे बनी पकवान अर्पित करें।
  • इसके बाद मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें और आरती करें।
  • फिर दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

पूजा का महत्व

बता दें कि नवरात्रि में सप्तमी तिथि की रात को सिद्धियों की रात्रि कहा जाता है। इस दिन maa kaalaraatri की पूजा करने से रोग का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। मां की पूजा करते से ग्रह बाधा और भय दूर होता है। इसलिए नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।

मंत्र

ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: .

ॐ कालरात्र्यै नम:

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