खबर संसार, नई दिल्ली: सुभाष चंद्र बोस की वजह मिली थी भारत को आजादी- British पीएम, भारत आज 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मना रहा है। अमर जवान ज्योति के नेशनल वॉर मेमोरियल में विलय और गणतंत्र दिवस की बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी से एबाइड विद मी धुन को हटाए जाने पर कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर है। यह तब है जब 1971 युद्ध के नायक भी इन कदमों को सही ठहरा रहे हैं। अगर दूसरे विश्व युद्ध के खात्मे के बाद अंग्रेजों ने भारत को आजाद करने की सोची, तो वह कांग्रेस या महात्मा गांधी का प्रभाव नहीं, बल्कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस का डर था। ये कहना है उस समय के तत्कालीन British पीएम क्लीमेंट एटली का।
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जनरल जीडी बख्शी की किताब ”बोसः एन इंडियन समुराई ” और रंजन बोरा की 1982 में आई किताब के एक प्रसंग से नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज का ब्रिटिश राज से आजादी दिलाने में योगदान स्पष्ट हो जाता है। इसमें भारत की आजादी के पत्र पर साइन करने वाले तत्कालीन British पीएम (प्रधानमंत्री) क्लीमेंट एटली जो कि 1945 से 1951 तक ब्रिट्रेन के प्रधानमंत्री रहे। जिसमें स्पष्ट तौर पर ब्रिटिश हुक्मरानों पर उस दबाव का जिक्र किया गया था, जिसकी वजह से अंग्रेजों ने भारत को आजाद करने का मन पक्के तौर पर बना लिया था।
एटली ने नेताजी को बताया भारत छोड़ने का कारण
जब कुछ समय पहले गांधी का अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन अपनी धार खो चुका था और जब अंग्रेज हुक्मरानों के लिए जल्दबाजी में भारत छोड़ने के लिए तात्कालिक कोई दबाव नहीं था, तो अंग्रेज हुक्मरानों ने भारत को बहुप्रतीक्षित आजादी देने का फैसला तुरत-फुरत क्यों किया? इसके जवाब में क्लीमेंट एटली ने कई कारणों का हवाला दिया था, जिनमें ब्रिटिश राजशाही के प्रति निष्ठा में कमी आने के साथ-साथ एक बड़ा कारण सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिंद फौज की वजह से अंग्रेज सेना में फूटते बगावत के अंकुर थे।
British पीएम एटली ने आगे कहा कि ” हम जान गए थे कि अब ज्यादा दिनों तक भारत पर कब्जा बनाए रखना मुश्किल है। यह सुभाष चंद्र बोस का प्रभाव था कि भारतीय लोगों में राष्ट्रवाद का प्रवाह अचानक बहुत तेजी से बढ़ गया था। ” अगर हमने इस देश को छोड़ा नहीं तो हमें खूनी क्रांति का सामना करना पड़ेगा। ” अंग्रेज खूनी क्रांति होने की आशंका से भयभीत होकर भारत को आजादी देने के लिए मजबूर हुए थे। ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’। उनकी इस प्रेरणादायी उक्ति ने लोगों के दिलों में आजादी के लिए आग पैदा कर दी थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जिनका संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे अहम हिस्सा था। शुक्र है कि अब जाकर उनके कार्यों को पूरा सम्मान मिल रहा है।


