मसूरी, खबर संसार। कंपनी गार्डन विवाद से इतर भ्रष्टाचारी अनुज गुप्ता और उसके सहयोगी अधिशासी अधिकारी यूडी तिवारी का पापी पेट इतना फूल गया है कि ये दोनों पर्यटकों की जान के भी पीछे पड़ गए हैं।
इस भ्रष्ट जोड़ी ने मसूरी नगर पालिका की जिन छह बेशकीमती संपत्तियों को नीलाम करने का गोरखधंधा शुरू किया उनमें झूलाघर में एक रेंजर झूले का संचालन एवं स्थापना का भी कार्य था। गत जुलाई माह में इस भ्रष्ट जोड़ी ने दूसरी अन्य नीलामियों के साथ 30 साल के लिए झूलाघर में रेंजर झूला की स्थापना व संचालन की निविदा भी जारी की।
रेंजर झूले के लिए किसी अनुभवी की जरूरत थी
मसूरी नगर पालिका द्वारा जारी किए जा रहे दर्जनों ई-निविदाओं में एकमात्र यह एक ऐसा कार्य है जिसके संचालन व अनुरक्षण के लिए किसी अनुभवी फर्म की जरूरत थी, लेकिन भ्रष्टाचार में अंधे हो चुके गुप्ता व तिवारी की जोड़ी ने जो बिड डाक्यूमेंट जारी किया उससे पता चलता है कि उन्हें सबसे खतरनाक प्रवृत्ति के इस रेंजर झूले के लिए किसी अनुभव व वित्तीय रूप से सक्षम कंपनी की जरूरत ही महसूस नहीं हुई।
दूसरी ओर रेंजर झूले से होने वाली दुर्घटनाओं पर गौर करें तो दुनियाभर में इससे अब तक सैकड़ों पर्यटकों की जानें जा चुकी हैं। भारत में ही रेंजर झूले से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन मूसरी की यह भ्रष्ट जोड़ी इस हदतक गिर चुकी है कि उसे किसी की जान की भी परवाह नहीं है। इस प्रकरण को लेकर एक शिकायती पत्र अधिशासी अधिकारी यूडी तिवारी को टेंडर जारी होने के तत्काल बाद ही दे दिया गया था, लेकिन उस पर भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
नगर पालिका से जुड़े सूत्र बताते हैं कि गुप्ता व तिवारी की जोड़ी पहले ही तय कर चुकी थी कि 30 साल के लिए रेंजर झूले का काम बैकडोर से अपने ही कब्जे में रखना है। हाईकोर्ट में भी कंपनी गार्डन विवाद के साथ रेंजर झूला घोटाले को साक्ष्य के तौर पर रखा गया है। अब देखना यह है कि मसूरी की यह बदनाम भ्रष्ट जोड़ी अपने इरादों में कहां तक कामयाब हो पाती है, या फिर इन्हें देर-सबेर सुद्वोवाला जेल की ओर जाना पड़ता है।
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