संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने अपने संबोधन में निजी अनुभव साझा करते हुए राजनीतिक मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi को याद करते हुए बताया कि बचपन में एक घटना ने उन्हें “डर से लड़ना” सिखाया।
राहुल गांधी ने कहा कि एक बार उनकी दादी उन्हें बाहर छोड़कर चली गई थीं, जहां वे डर गए थे। बाद में जब उन्होंने यह बात बताई, तो इंदिरा गांधी ने समझाया कि डर असल में उनके मन में था।
“डर से लड़ना दादी ने सिखाया”
अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा कि जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ सीखने को मिलता है, चाहे वह मां हो, बहन हो या कोई अन्य महिला। उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्चाई भले ही कड़वी हो, लेकिन उसका सामना करना जरूरी है। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रस्तावित विधेयक को महिलाओं के हित में बताना पूरी तरह सही नहीं है।
महिला आरक्षण बिल पर सरकार से सवाल
राहुल गांधी ने 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सत्ता पक्ष के सहयोगियों ने इसके लागू होने को लेकर 10 साल का समय बताया था। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व देने में देरी क्यों हो रही है।
“इलेक्टोरल मैप बदलने की कोशिश”
कांग्रेस नेता ने सरकार पर देश के चुनावी नक्शे को बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा महिला आरक्षण से अलग है, लेकिन इससे लोकतांत्रिक संरचना प्रभावित हो सकती है।
जाति जनगणना पर स्पष्टता की मांग
राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने इस पर बात तो की, लेकिन यह साफ नहीं किया कि इसके आंकड़ों का उपयोग आरक्षण तय करने में होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार जाति जनगणना के आधार पर वास्तविक प्रतिनिधित्व देने के लिए तैयार है, तो कांग्रेस इसका पूरा समर्थन करेगी।
सरकार पर “डर की राजनीति” का आरोप
अपने भाषण में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर “डर की राजनीति” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छोटे राज्यों को यह संकेत दिया जा रहा है कि उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम की जा सकती है, जिसे विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा।
दलित और ओबीसी प्रतिनिधित्व पर जोर
राहुल गांधी ने कहा कि दलित और ओबीसी समुदायों को केवल नाम के लिए पहचान दी जाती है, लेकिन उन्हें पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी इन वर्गों के अधिकारों की रक्षा करेगी।
प्रतिनिधित्व पर कोई समझौता नहीं
लोकसभा में अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि वे देश के लोगों को आश्वस्त करते हैं कि उनके प्रतिनिधित्व से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने महिला आरक्षण को जाति जनगणना और सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए सरकार पर स्पष्ट नीति लाने का दबाव बनाया।
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