हल्द्वानी, खबर संसार। विश्व पर्यावरण दिवस पर जिले भर में सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों द्वारा वृक्षारोपण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जगह-जगह नेताओं, अधिकारियों और स्कूलों के बच्चों ने कैमरों के सामने पौधे लगाते हुए “हरित क्रांति” के नारे लगाए।
हालांकि, यह पूरा आयोजन एक दिन की रस्म अदायगी बनकर रह गया। कई स्थानों पर पौधारोपण केवल फोटो खिंचवाने और सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने तक ही सीमित रहा। पिछले वर्षों में लगाए गए ऐसे सैकड़ों पौधे आज या तो सूख चुके हैं या पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं।
वृक्षारोपण के बाद नहीं हो रही उचित देखीभाल
स्थानीय निवासी ने बताया, “पिछले साल हमारे गांव में 1000 पौधे लगाए गए थे, लेकिन एक भी पेड़ नहीं बचा। न तो पानी दिया गया, न सुरक्षा की व्यवस्था की गई।” तो वहीं एक अधिकारी का कहना है कि बजट और जनभागीदारी की कमी के चलते दीर्घकालिक देखरेख मुश्किल होती है।
वृक्षारोपण के विशेषज्ञ के अनुसार, “पेड़ लगाना पहला कदम है, असली काम उसकी देखभाल करना है। यदि हर व्यक्ति एक पौधे की जिम्मेदारी ले तो हरियाली केवल नारे नहीं, हकीकत बन सकती है।”
सरकार द्वारा भले ही लाखों पौधे लगाने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जब तक स्थानीय लोगों को इसके लिए जागरूक और जिम्मेदार नहीं बनाया जाएगा, तब तक यह मुहिम कागज़ों और तस्वीरों तक ही सीमित रहेगी।
विश्व पर्यावरण दिवस पर होगी ”एक पेड़ मां के नाम” 2.0 की शुरुआत
इस साल ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर ”एक पेड़ मां के नाम” 2.0 का शुभारंभ होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन लाइफ के विजन को आगे बढ़ाने के मकसद से ही इस मुहिम के दूसरे चरण की शुरुआत हो रही है।
इसके तहत 10 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस मुहिम के शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देशवासियों खासकर विद्यार्थियों से अपील की है कि वो इससे अधिक से अधिक जुड़े और पेड़ लगाएं।
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