मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज़ भारत के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ की तैयारी कर रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अपनी दूरसंचार शाखा जियो इन्फोकॉम के 5% शेयर बेचकर लगभग 52,200 करोड़ रुपये (6 अरब डॉलर) जुटाने की योजना बना रही है।
यह आईपीओ अगले साल की शुरुआत में आ सकता है, बशर्ते कंपनी को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से विशेष अनुमति मिल जाए। मौजूदा नियमों के अनुसार कंपनियों को कम से कम 25% पब्लिक फ्लोट देना होता है, लेकिन रिलायंस ने इतनी बड़ी पेशकश के लिए बाजार में तरलता की कमी का हवाला देते हुए छूट की मांग की है।
आईपीओ में सेबी से छूट की उम्मीद
सूत्रों के अनुसार, रिलायंस ने सेबी के साथ अनौपचारिक बातचीत शुरू कर दी है ताकि वह सामान्य से कम फ्लोट के साथ आईपीओ ला सके। अगर 5% हिस्सेदारी बेचने की अनुमति मिल जाती है, तो यह पेशकश भारत में अब तक की सबसे बड़ी होगी, जो हुंडई इंडिया के प्रस्तावित ₹28,000 करोड़ आईपीओ से कहीं अधिक है।
निवेशकों की निगाहें AGM पर
सिटी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त में होने वाली रिलायंस की वार्षिक आम बैठक में जियो आईपीओ से जुड़े संकेत मिल सकते हैं। संभावित देरी और लिस्टिंग नियमों में लचीलापन जैसे मुद्दों पर निवेशकों की निगाहें टिकी हैं।
2020 में गूगल और फेसबुक (मेटा) जैसे ग्लोबल दिग्गजों ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया था। इस आईपीओ से उन्हें बाहर निकलने का रास्ता मिल सकता है, हालांकि 5% फ्लोट कुछ निवेशकों को कम लग सकता है। अगर सबकुछ योजना के मुताबिक रहा, तो जियो का आईपीओ भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इसके ज़रिए न सिर्फ़ निवेशकों को अवसर मिलेगा, बल्कि भारतीय शेयर बाजार को भी नई ऊंचाई मिलेगी।
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