भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (यूपीआई) की भूमिका लगातार मज़बूत हो रही है। हर महीने करीब 20 अरब लेन-देन और 25–30 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ताओं के साथ यूपीआई अब सिर्फ़ भुगतान का साधन नहीं, बल्कि एक संपूर्ण क्रेडिट इकोसिस्टम बनने की ओर बढ़ रहा है।
एनपीसीआई की नई पहल
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) यूपीआई के अगले चरण पर काम कर रहा है। इसके तहत उपभोक्ताओं को विकल्प मिलेगा कि वे किसी भी यूपीआई भुगतान को तुरंत ईएमआई में बदल सकें। सूत्रों के अनुसार, यह अनुभव दुकानों पर कार्ड स्वाइप कर भुगतान को किस्तों में बदलने जैसा होगा। एनपीसीआई ने इसके लिए गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं।
फिनटेक और बैंकों को अवसर
इस सुविधा से फिनटेक कंपनियों और बैंकों को बड़ा बिज़नेस अवसर मिलेगा। नवी जैसे प्लेटफ़ॉर्म और कुछ निजी बैंक पहले ही यूपीआई पर क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराने में जुटे हैं। अब तक यूपीआई लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता था, जिससे फिनटेक कंपनियों की आय सीमित थी। लेकिन क्रेडिट-आधारित लेन-देन पर प्रस्तावित 1.5% इंटरचेंज शुल्क राजस्व का नया स्रोत बनेगा।
उपभोक्ताओं के लिए फायदे
ईएमआई विकल्प से छोटे-मोटे ख़र्चों से लेकर बड़ी ख़रीदारी तक भुगतान आसान होगा। जिन उपभोक्ताओं के पास क्रेडिट कार्ड नहीं हैं, वे भी ‘चेकआउट फाइनेंसिंग’ का लाभ उठा पाएंगे। यह सुविधा उपभोक्ता की ख़रीद क्षमता को बढ़ाएगी और व्यापारियों को बिक्री बढ़ाने का अवसर देगी।
चुनौतियाँ भी मौजूद
हालाँकि, इस नई व्यवस्था के साथ जोखिम भी जुड़ा है। छोटे मूल्य के क्रेडिट और बाय-नाउ-पे-लेटर मॉडल में ऋण चूक (डिफॉल्ट) की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को सावधानी बरतनी होगी। उपभोक्ताओं के लिए वित्तीय अनुशासन और ब्याज दरों की पारदर्शिता बेहद ज़रूरी होगी। स्पष्ट है कि यूपीआई अब सिर्फ़ एक भुगतान ऐप नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ईएमआई सुविधा जुड़ने के बाद यह और व्यापक रूप लेगा। अगर बैंक, फिनटेक और उपभोक्ता जिम्मेदारी से इसका उपयोग करें, तो यूपीआई न केवल डिजिटल भुगतान बल्कि डिजिटल क्रेडिट में भी भारत को वैश्विक नेतृत्व दिला सकता है।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस


