ऑस्ट्रेलिया के बाद अब ब्रिटेन सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकती है। यूके सरकार ने इस विषय पर विचार प्रक्रिया शुरू कर दी है और दुनियाभर के उदाहरणों का अध्ययन किया जा रहा है कि ऐसा बैन कितना असरदार हो सकता है।
गौरतलब है कि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने वाला दुनिया का पहला देश बना था। अब ब्रिटेन भी उसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है।
ब्रिटेन सरकार क्या करने वाली है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूके सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें सबसे अहम डिजिटल सहमति की उम्र बढ़ाना शामिल है, जो फिलहाल 13 साल है। सरकार इसे बढ़ाकर 15 या 16 साल करने पर विचार कर सकती है।
इसके अलावा बच्चों के फोन इस्तेमाल पर फोन कर्फ्यू लगाने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत पर रोक लगाई जा सके। वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद स्ट्रीक्स और अनंत स्क्रॉल जैसे फीचर्स को भी सीमित करने की बात हो रही है, क्योंकि ये बच्चों में डिजिटल लत पैदा करते हैं।
यूके सरकार के मंत्री जल्द ही ऑस्ट्रेलिया का दौरा करेंगे और वहां लागू किए गए नियमों का अध्ययन करेंगे। साथ ही, उम्र सत्यापन (Age Verification) सिस्टम को और मजबूत बनाने की योजना है, ताकि बच्चे फर्जी अकाउंट न बना सकें।
यह कदम क्यों जरूरी समझा जा रहा है?
हाल ही में एलन मस्क के Grok AI चैटबॉट द्वारा बिना सहमति के अश्लील तस्वीरें बनाने का मामला सामने आया था, जिसमें बच्चों से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट भी शामिल था। इस घटना के बाद दुनियाभर में चिंता बढ़ गई।
ब्रिटेन सरकार अब ऐसे AI टूल्स पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है, जो कपड़ों को हटाकर न्यूड तस्वीरें बनाते हैं। सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि बच्चे न तो न्यूड तस्वीरें बना सकें, न शेयर करें और न ही देख सकें।
राजनीतिक बहस तेज
इस मुद्दे पर ब्रिटेन में सियासी बहस भी शुरू हो गई है। विपक्षी नेता केमी बेडेनोच ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में होती, तो 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहले ही बैन कर दिया गया होता। उन्होंने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर देरी करने का आरोप लगाया है। हालांकि, साफ है कि सरकार और विपक्ष — दोनों ही बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एकमत नजर आ रहे हैं।
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