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कच्चा तेल हुआ सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल पर क्यों नहीं मिल रही राहत?

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखी जा रही है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि सिर्फ ग्लोबल मार्केट में तेल सस्ता होने से घरेलू स्तर पर फ्यूल के दाम तुरंत कम नहीं किए जा सकते।

पेट्रोल-डीजल के दाम पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री?

पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने गुरुवार को कहा कि ईंधन की कीमतें तय करने में कई अहम फैक्टर शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ता हुआ कच्चा तेल भारत तक पहुंचने में समय लगता है, इसलिए कीमतों में बदलाव का असर तुरंत दिखाई नहीं देता।

मंत्री ने कहा कि हाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 3.94 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि अब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आई हैं, लेकिन इसे तत्काल वापस लेना संभव नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी वजह भी आई सामने

सुरेश गोपी ने कहा कि भारत तक कच्चा तेल मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पहुंचता है। इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की भारी आवाजाही रहती है, जिसके कारण तेल की सप्लाई में समय लगता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमत घटने के बाद भी उसका सीधा असर भारतीय बाजार में आने में कुछ समय लग सकता है।

“केंद्र सरकार ने खुद उठाया वित्तीय बोझ”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फरवरी में शुरू हुए ईरान-अमेरिका तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर तेल कंपनियों पर गंभीर रूप से पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ डालने के बजाय खुद आर्थिक दबाव उठाया।

गोपी के मुताबिक, इस फैसले के कारण केंद्र सरकार को करीब 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राज्य सरकार ने ईंधन पर टैक्स कम करके अपने राजस्व में कटौती नहीं की।

ईरान-अमेरिका डील के बाद क्यों गिरे तेल के दाम?

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने का रास्ता साफ हो गया है। दुनिया का लगभग 20 फीसदी कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

तनाव के दौरान होर्मुज स्ट्रेट पर संकट बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि अब हालात सामान्य होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत घटकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।

क्या आगे सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और सप्लाई सामान्य रहती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल सरकार ने तत्काल कटौती के संकेत नहीं दिए हैं।


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