खबर संसार हल्द्वानी आत्मनिर्भरता की मिसाल: दिवाडैंगल्स की हस्तनिर्मित क्रोशिया और कलावे की राखियां बन रही हैं महिलाओं की पहली पसंद, जी हा रक्षाबंधन के पावन अवसर पर उत्तराखंड की स्थानीय हस्तकला को नई पहचान देने का कार्य Divadangles कर रहा है। इस ब्रांड की संस्थापक साक्षी बेलवाल अपने हाथों से बनी सुंदर क्रोशिया और कलावे की हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों में केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारंपरिक कला और महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का संदेश भी छिपा है।
दिवाडैंगल्स का उद्देश्य केवल राखियां बेचना नहीं, बल्कि स्थानीय महिलाओं को रोजगार और सम्मान दिलाना है। प्रत्येक राखी को धैर्य, मेहनत और बारीकी से हाथों से तैयार किया जाता है, जिससे हर राखी एक अनोखी पहचान बन जाती है। मशीन से बनी राखियों की तुलना में हस्तनिर्मित राखियां लंबे समय तक यादगार रहती हैं और भाई-बहन के रिश्ते में अपनापन जोड़ती हैं।
Divadangles द्वारा तैयार की गई क्रोशिया और कलावे की हस्तनिर्मित राखियां मात्र ₹30 से शुरू हैं। ग्राहकों के लिए कई आकर्षक डिज़ाइन उपलब्ध हैं, जिन्हें अपनी पसंद के अनुसार भी बनवाया जा सकता है।संस्थापक साक्षी बेलवाल का कहना है कि यदि लोग स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाई गई हस्तनिर्मित राखियों को अपनाएं, तो इससे महिलाओं को रोजगार मिलेगा, उनकी आजीविका मजबूत होगी और उत्तराखंड की पारंपरिक हस्तकला को भी नई पहचान मिलेगी। यह पहल “Vocal for Local” और “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को भी मजबूत करती है।इस रक्षाबंधन पर अपने भाई के लिए एक खास, पर्यावरण-अनुकूल और प्यार से बनी Divadangles की हस्तनिर्मित राखी चुनें और स्थानीय महिलाओं के सपनों को नई उड़ान दें।
