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गर्मियों में क्यों बढ़ रहे हैं शॉर्ट सर्किट व आग लगने के मामले? जानिए बड़ी वजह

उत्तर भारत में भीषण गर्मी के दौरान आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल के दिनों में दिल्ली और लखनऊ में हुए दर्दनाक हादसों ने एक बार फिर बिल्डिंग सुरक्षा और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 3 जून को दिल्ली के हौज रानी इलाके में एक इमारत में आग लगने से 23 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 22 जून को लखनऊ की एक बहुमंजिला बिल्डिंग में लगी आग ने 15 युवाओं की जान ले ली। शुरुआती जांच में दोनों घटनाओं के पीछे शॉर्ट सर्किट और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को बड़ी वजह माना गया है।

क्या होता है शॉर्ट सर्किट और कैसे लगती है आग?

बिजली के तारों में करंट एक निश्चित रास्ते से गुजरता है। सामान्य स्थिति में तार सीमित मात्रा में गर्मी सहन कर लेते हैं, लेकिन जब बिजली को अचानक छोटा और आसान रास्ता मिल जाता है तो करंट तेजी से बहने लगता है। इसी स्थिति को शॉर्ट सर्किट कहा जाता है।

करंट का तेज बहाव तारों में अत्यधिक गर्मी और चिंगारी पैदा करता है। यही चिंगारी आसपास मौजूद ज्वलनशील चीजों को आग की चपेट में ले लेती है। आधुनिक घरों में सर्किट ब्रेकर जरूर लगाए जाते हैं, लेकिन कई बार आग धीरे-धीरे शुरू होती है, जिसे यह सिस्टम तुरंत पकड़ नहीं पाता।

ढीले वायरिंग कनेक्शन कैसे बनते हैं खतरा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार आग अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे पनपती है। जब भारी बिजली उपकरण जैसे AC, गीजर या फ्रिज को कमजोर या पतले तारों से जोड़ा जाता है, तो वायरिंग पर दबाव बढ़ने लगता है।

इसी तरह, जहां दो तार जुड़े होते हैं वहां यदि कनेक्शन ढीला हो जाए तो रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। ज्यादा रेजिस्टेंस की वजह से तार गर्म होने लगते हैं और धीरे-धीरे उनके बीच बेहद छोटा गैप बन जाता है। इसके बाद बिजली उस गैप को पार करने के दौरान लगातार स्पार्क पैदा करती रहती है। यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलने के बाद अचानक बड़ी आग का रूप ले सकती है।

45 डिग्री तापमान में कमजोर पड़ रहे इलेक्ट्रिकल तार

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर इलेक्ट्रिकल तार और उपकरण सामान्यतः 33 डिग्री तापमान को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं। लेकिन उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान तापमान कई बार 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है।

ऐसे हालात में तारों की बिजली वहन करने की क्षमता कम हो जाती है। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण वायरिंग तेजी से गर्म होकर पिघलने लगती है। दूसरी ओर, इसी समय घरों और दफ्तरों में AC, कूलर और रेफ्रिजरेटर जैसे भारी उपकरण लगातार चलते रहते हैं, जिससे बिजली सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

AC क्यों बनते जा रहे हैं बड़ा खतरा?

दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में AC फटने और उनमें आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि AC को शुरू होने के समय ज्यादा पावर की जरूरत होती है, जो कैपेसिटर नाम के पार्ट से मिलती है।

तेज गर्मी और लंबे समय तक लगातार चलने के कारण यह कैपेसिटर कमजोर पड़ सकता है। इसके चलते मोटर पर दबाव बढ़ता है और उसके जलने का खतरा पैदा हो जाता है। इसके अलावा, AC के लगातार कंपन से अंदरूनी वायरिंग ढीली हो सकती है, जिससे शॉर्ट सर्किट की आशंका बढ़ जाती है।

आजकल कई AC यूनिट्स में R-32 और प्रोपेन जैसी ज्वलनशील गैसों का इस्तेमाल हो रहा है। यदि आउटडोर यूनिट से गैस लीक हो रही हो और उसी समय कोई स्पार्क पैदा हो जाए, तो बड़ा विस्फोट भी हो सकता है।

आग से बचने के लिए क्या सावधानियां जरूरी?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों में इलेक्ट्रिकल सिस्टम की नियमित जांच बेहद जरूरी है। पुराने तार, ढीले कनेक्शन और ओवरलोडेड प्लग पॉइंट्स को तुरंत बदलवाना चाहिए। इसके अलावा भारी उपकरणों के लिए सही क्षमता वाली वायरिंग और ब्रेकर का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

AC और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की समय-समय पर सर्विसिंग कराना, खराब वायरिंग को नजरअंदाज न करना और बिल्डिंग में फायर सेफ्टी नियमों का पालन करना बड़े हादसों को रोक सकता है।


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