भारत के ‘मिलेनियम सिटी’ गुरुग्राम में सोमवार को हुई भारी बारिश के बाद हालात बिगड़ गए। लग्जरी अपार्टमेंट्स और कॉर्पोरेट टावरों के लिए पहचाने जाने वाले गोल्फ कोर्स रोड (‘बिलेनियर्स माइल’) पर घुटने तक पानी भर गया। सिग्नेचर टावर फ्लाईओवर पर वाहन धीमी गति से चलते नजर आए और जाम की स्थिति बन गई। नेशनल हाईवे (NH-48) पर भी जलभराव और कीचड़ के कारण लोग घंटों फंसे रहे।
प्रशासन ने स्कूलों और कॉर्पोरेट दफ्तरों के लिए जारी की सलाह
सड़कों की स्थिति को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने सोमवार शाम दखल दिया। सभी कॉर्पोरेट ऑफिसों को ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ और स्कूलों को ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने की सलाह दी गई। इसका उद्देश्य सड़कों पर यातायात का दबाव कम करना और सिविक एजेंसियों को नालों की सफाई व मरम्मत का काम तेजी से करने का अवसर देना था।
सुभाष चौक से उद्योग विहार तक यातायात प्रभावित
सुभाष चौक पर कई स्कूल बसें गहरे पानी में फंस गईं। उद्योग विहार में जलभराव और बेहद कम विजिबिलिटी के कारण दोपहिया वाहन चालकों को फ्लाईओवर के नीचे शरण लेनी पड़ी। राजीव चौक, हीरो होंडा चौक, गोल्फ कोर्स रोड, इफ्को चौक, ओल्ड दिल्ली-गुड़गांव रोड, शीतला माता मंदिर रोड, सोहना रोड, नाहरपुर, वाटिका चौक और नरसिंहपुर में घंटों लंबा जाम रहा। दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे और MG रोड पर भी यातायात थम गया। बंद वाहनों को हटाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक टीमों ने क्रेन का सहारा लिया।
75 मिमी बारिश, ड्रोन से हुई निगरानी
सोमवार सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक गुरुग्राम में 75 मिमी बारिश दर्ज की गई। बादशाहपुर में 65 मिमी और वजीराबाद में 64 मिमी बारिश हुई। कादीपुर व हरसारू में 40-40 मिमी, मानेसर में 36 मिमी, सोहना में 16 मिमी, पटौदी में 12 मिमी और फर्रुखनगर में 7 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। जलभराव वाले इलाकों और प्रमुख चौराहों की निगरानी के लिए गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस ने ड्रोन कैमरों का सहारा लिया।
गुरुग्राम में हर साल जलप्रलय के 10 मुख्य कारण
- मौसम नहीं, ढांचागत नाकामी: प्राकृतिक जल निकासी तंत्र के खत्म होने को जलभराव का प्रमुख कारण बताया गया है।
- प्राकृतिक ढलान की अनदेखी: अरावली पहाड़ियों से नजफगढ़ ड्रेन की ओर 90 मीटर की प्राकृतिक ढलान थी।
- चेक डैम और ऐतिहासिक बांध नष्ट: लगभग 100 चेक डैम और घाटा, झारसा व वजीराबाद जैसे ऐतिहासिक बांध खत्म हो चुके हैं।
- जल निकायों पर अवैध कब्जे: घाटा बांध 370 एकड़ से घटकर मात्र 2 एकड़ रह गया है।
- अत्यधिक कंक्रीटीकरण: शहर की 60% से अधिक जमीन पर इमारतें और सड़कें बन चुकी हैं।
- नाममात्र का ग्रीन कवर: प्रति व्यक्ति हरियाली 5 वर्ग मीटर से भी कम रह गई है।
- प्राकृतिक जलमार्गों पर निर्माण: गोल्फ कोर्स रोड जैसी प्रमुख सड़कें प्राकृतिक जलमार्गों के ऊपर बनाई गई हैं।
- ड्रेनेज नेटवर्क पर दबाव: 80% बारिश का पानी सीधे सड़कों और नालों पर आने से ड्रेनेज ओवरफ्लो हो जाता है।
- अरावली से सीधा बहाव: पानी रोकने के लिए पर्याप्त तालाब या बफर सिस्टम नहीं बचा है।
- खराब अर्बन प्लानिंग: वार्षिक जलभराव को अनियोजित शहरी विकास की देन बताया गया है।
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