दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कहा है कि प्रदूषण फैलाने के मामले में सरकारी गाड़ियों को भी कोई छूट नहीं मिलेगी। एनजीटी ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए हैं कि बिना वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) सड़कों पर चलने वाली सभी सरकारी गाड़ियों पर तुरंत रोक लगाई जाए और उनका भारी चालान काटा जाए। यह आदेश NGT चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद ने जितेंद्र महाजन की याचिका पर सुनाया।
याचिका में क्या लगाया गया आरोप
जितेंद्र महाजन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि दिल्ली में कई सरकारी और सरकार द्वारा किराए पर ली गई गाड़ियां बिना वैध PUC सर्टिफिकेट के सड़कों पर चल रही हैं। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने भी इस बात से इनकार नहीं किया कि PUC के नियम सरकारी और निजी, दोनों तरह की गाड़ियों पर बराबर लागू होने चाहिए।
आम जनता के बाद सरकारी वाहनों पर सख्ती
आमतौर पर ट्रैफिक पुलिस आम जनता के वाहनों का PUC सर्टिफिकेट जांचती है। सर्टिफिकेट नहीं होने पर 10,000 रुपये का चालान काटा जाता है। एनजीटी के पास आई शिकायत में दिल्ली सरकार के कई विभागों की गाड़ियों के बिना वैध PUC चलने की बात सामने आई थी।
पुरानी गाड़ियों के लिए पहले से नियम
NGT ने याद दिलाया कि PUC सर्टिफिकेट सॉफ्टवेयर में पहले से ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत 10 साल से पुरानी डीजल और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता। यह नियम सरकारी और निजी दोनों वाहनों पर लागू है। दिल्ली में फिलहाल करीब 950 PUC सेंटर चल रहे हैं।
10 बड़े बिंदुओं में पूरा मामला
- NGT ने सरकारी गाड़ियों पर सख्ती के निर्देश दिए।
- बिना वैध PUC सरकारी वाहन सड़कों पर नहीं चल सकेंगे।
- नियम तोड़ने पर भारी चालान काटा जाएगा।
- आदेश दिल्ली सरकार को दिए गए हैं।
- मामला जितेंद्र महाजन की याचिका से जुड़ा है।
- याचिका में सरकारी वाहनों के बिना PUC चलने का आरोप लगाया गया।
- PUC नियम सरकारी और निजी दोनों वाहनों पर लागू हैं।
- बिना PUC वाहन चलाने पर 10,000 रुपये तक का चालान है।
- 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को PUC जारी नहीं होता।
- 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को भी PUC जारी नहीं होता।
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