खबर संसार किच्छा |राजेश तिवारी नाम से किच्छा विधानसभा में 5906 आपत्तियां दर्ज, तो पहले इसकी जाँच जरुरी या 5906 कि?जी हा मामला चर्चित और जनता के बीच सुर्खियों में है कि एक व्यक्ति जो राजेश तिवारी है, ने किच्छा विधानसभा में 5906 आपत्तियां दर्ज हुई,उत्तराखंड के तीन जिलों नील ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में वोट काटने की फॉर्म-10 में सबसे ज्यादा आपत्तियां सामने आई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने इन जिलों में विशेष निगरानी के लिए नौ आईएएस-पीभीएस बतौर पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वोटर और आपत्तिकर्ता को नोटिस जारी कर सुनवाई किए बिना निस्तारण नहीं होगा।
एक व्यक्ति पांच या इससे अधिक आपत्तियां दर्ज कर सकता है। ऊधमसिंह नगर जिले की किच्छा विधानसभा में अकेले राजेश तिवारी के नाम से 5906 आपत्तियों दर्ज हुई हैं। इसी प्रकार, कई और विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में एक ही नाम से आपत्तियां सामने आई हैं।अनुपस्थित या स्थायी तौर पर शिफ्ट श्रेणी में 40,906 मामले दर्ज,मुख्य निर्वाचन अधिकारी बोले, लापरवाह अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीआरसी पुरुषोत्तम ने सोमवार को कुमाऊ-गढ़वाल के मंडल आयुक्तों सहित देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल एवं ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की समीक्षा की। बैठक के दौरान तीनों शिलाधिकारियों ने दहले एवं आपतियों के निस्तारण के संबंध में अब तक ‘की कार्रवाई के साथ ही आगे की रणनीति पर जिलेवार विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी दावे एवं आपत्तियों की नियमानुसार सुनवाई की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए यथोचित कार्रवाई की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला स्तर पर राजनीतिक दलों और मीडिया के साथ नियमित संवाद करते रहें। ब्यूरो
हुए हैं। 2,575 मतदाताओं के स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट होने की अलग से शिकायत दर्ज की गई हैं। 40,906 लोगों के घर पर न मिलने या दूसरी जगह शिफ्ट होने की आपत्तियां चुनाव आयोग के,अधिकारियों के सामने चुनौती है। इन मामलों में अब यह सत्यापित करना जरूरी होगा कि संबंधित,मतदाता वास्तव में उसी विधानसभा क्षेत्र में निवास कर रहा है या नहीं। यदि मतदाता दूसरी जगह स्थायी रूप से जा चुका है तो पुराने पते की मतदाता सूची में उसका नाम बने रहना भी सवाल खड़ा करता है आयोग के सामने ये भी चुनौती कि आपत्तियों के पीछे को राजनीतिक षडयंत्र ने हो।






