साल 2026 में सुपर अल नीनो के कारण दुनियाभर में बारिश के पैटर्न में बदलाव और तापमान में वृद्धि देखने को मिल रही है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने ‘अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर’ तैयार किया है। यह टूल अल नीनो के कारण बढ़ने वाली गर्मी से इंसानों को होने वाले खतरे का अनुमान देता है। इसमें हर महीने के आंकड़ों के साथ अगले छह महीनों में संभावित मौतों का पूर्वानुमान भी शामिल है।
यह ट्रैकर जून में अल नीनो की शुरुआत के बाद से गर्मी के कारण हुई मौतों का अनुमान प्रस्तुत करता है। इसके जरिए दुनियाभर के राज्यों का डेटा उपलब्ध कराया जाता है, जिससे फंड देने वाले और राहत कार्यों में जुटे लोग सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं। इससे यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किन क्षेत्रों में संसाधनों की अधिक जरूरत है और कहां लोगों की जान बचाने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।
कुल कितनी मौतों का अनुमान?
ट्रैकर में अब मार्च तक का डेटा शामिल किया गया है। इसके मुताबिक, अल नीनो के चलते बढ़ी गर्मी से कुल लगभग 8,57,000 मौतें हो सकती हैं। इनमें से करीब 3,73,000 मौतें अगले छह महीनों में होने का अनुमान है।
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में अर्थशास्त्र के मिल्टन फ्रीडमैन डिस्टिंग्विश्ड सर्विस प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा कि यह शोध नई पूर्वानुमान क्षमताओं के जरिए इस अहम सवाल का जवाब देता है कि भीषण गर्मी के कारण किन क्षेत्रों में लोगों की जान जा सकती है।
उन्होंने कहा कि गर्मी के जानलेवा प्रभावों का पहले से अनुमान लगाना एक बड़ा कदम है। इससे सबसे ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते जरूरी उपाय किए जा सकते हैं। उनके मुताबिक, यह ट्रैकर मौजूदा सुपर अल नीनो के प्रभावों की जानकारी देता है।
नाइजीरिया और भारत में सबसे ज्यादा खतरा
माइकल ग्रीनस्टोन के अनुसार, अल नीनो के कारण गर्मी से होने वाली सबसे ज्यादा मौतें विकासशील देशों में होने का अनुमान है। अक्टूबर से मार्च तक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नाइजीरिया में लगभग 56,000 मौतें हो सकती हैं। इसके बाद भारत का स्थान है, जहां गर्मी से करीब 55,000 मौतें होने की आशंका है। इनमें से ज्यादातर मौतें मार्च में होने का अनुमान लगाया गया है।
दक्षिण-पूर्व एशिया भी गर्मी से प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। इंडोनेशिया में अल नीनो के कारण लगभग 29,000 मौतों का अनुमान है। वहीं, ब्राजील में हर महीने गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या औसत से अधिक रहने की आशंका जताई गई है।
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब अल नीनो के खत्म होने तक इस ट्रैकर को हर महीने अपडेट करेगी। इससे गर्मी से संबंधित मौतों के जोखिम में होने वाले बदलावों की लगातार जानकारी मिलती रहेगी।
10 महत्वपूर्ण बिंदु: सुपर अल नीनो से जुड़ी बड़ी बातें
- सुपर अल नीनो: साल 2026 में तापमान बढ़ने और बारिश के पैटर्न में बदलाव की आशंका है।
- नया टूल: क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर तैयार किया है।
- मासिक डेटा: ट्रैकर हर महीने गर्मी से संबंधित मौतों के अनुमान उपलब्ध कराता है।
- कुल अनुमान: गर्मी के कारण लगभग 8,57,000 मौतें होने की आशंका है।
- अगले छह महीने: इस अवधि में करीब 3,73,000 मौतों का अनुमान है।
- नाइजीरिया: यहां लगभग 56,000 मौतें होने की आशंका जताई गई है।
- भारत: देश में करीब 55,000 मौतों का अनुमान है।
- मार्च का खतरा: भारत में अनुमानित मौतों में से ज्यादातर मार्च में होने की आशंका है।
- इंडोनेशिया और ब्राजील: इंडोनेशिया में करीब 29,000 मौतों का अनुमान है, जबकि ब्राजील में मासिक आंकड़े औसत से अधिक रह सकते हैं।
- ट्रैकर अपडेट: क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब अल नीनो के खत्म होने तक इसे हर महीने अपडेट करेगी।






