रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ताजिकिस्तान के दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की ‘काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट’ की बैठक को संबोधित करते हुए सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी मौजूद थे।
सिंह ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद से निपटने में किसी भी तरह का दोहरा मानदंड नहीं होना चाहिए। आतंकवादियों को आर्थिक मदद देने, उनका समर्थन करने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क को सामूहिक रूप से खत्म किया जाना चाहिए।
SCO के साथ संबंधों को भारत का महत्व
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ताजिकिस्तान के साथ अपनी पुरानी दोस्ती और मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को बहुत महत्व देता है। उन्होंने बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां नेताओं ने संगठन के 25 वर्षों की यात्रा की समीक्षा की और भविष्य की दिशा पर चर्चा की थी।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO से सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों के क्षेत्र में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया था। राजनाथ सिंह के अनुसार, यह संदेश संगठन की ‘काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट’ की बैठक के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर भी जताई चिंता
सिंह ने कहा कि वैश्विक आर्थिक माहौल में अनिश्चितता बनी हुई है। संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही हैं, जबकि ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा भी चिंता के विषय हैं। उन्होंने कहा कि नई तकनीक अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही है और नए विभाजन पैदा कर रही है।
उन्होंने समावेशी आर्थिक सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि सप्लाई चेन मजबूत करने, व्यापार और निवेश आसान बनाने तथा विकास के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने की जरूरत है। आर्थिक सहयोग का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। भारत 2026–2030 की बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्ययोजना का समर्थन करता है।
आतंकवाद से विकास और युवाओं पर असर
रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद निर्दोष लोगों की जान लेने के साथ निवेश और व्यापार को भी बाधित करता है। इससे समाजों में कट्टरता फैलती है और युवा उन अवसरों से वंचित रह जाते हैं, जिनके वे हकदार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। इससे निपटने के लिए सदस्य देशों को मिलकर आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करना चाहिए।
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