वर्षों तक पाकिस्तान में कहर बरपाने के बाद जिहादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अब बांग्लादेश में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। भारत के साथ 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करने वाला बांग्लादेश नई दिल्ली के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है।
ऐसे में वहां टीटीपी की बढ़ती सक्रियता भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। हाल ही में सामने आए सबूत बताते हैं कि बांग्लादेश से कम से कम दो पाकिस्तानी तालिबान समर्थक अफगानिस्तान तक पहुंच चुके हैं। उनमें से एक अप्रैल में वज़ीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया।
मलेशिया और बांग्लादेश में गिरफ्तारियां, खुली पोल
जून में मलेशियाई पुलिस ने 36 बांग्लादेशी नागरिकों को आतंकवादी नेटवर्क से कथित जुड़ाव के आरोप में गिरफ्तार किया। इसके बाद जुलाई में ढाका की आतंकवाद-रोधी इकाई (एटीयू) ने टीटीपी से संपर्क रखने के आरोप में दो लोगों, शमीन महफूज और मोहम्मद फोयसल को गिरफ्तार किया।
द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेशी अधिकारी फिलहाल खुफिया सूचनाओं के आधार पर सीमित कार्रवाई कर रहे हैं। एटीयू का गठन 2017 में ऐसे ही खतरों पर लगाम लगाने के लिए किया गया था।
बांग्लादेश में जिहादी समूहों को मिल रहा बढ़ावा
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में घरेलू कट्टरपंथी संगठनों को बल मिला है। बांग्लादेशी मीडिया में जुलाई में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, आठ बांग्लादेशी नागरिक अफगानिस्तान में टीटीपी के लिए सक्रिय हैं। इनमें से एक की मौत अप्रैल में हुई थी, लेकिन जानकारी बाद में उजागर हुई।
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि बांग्लादेश में चरमपंथ के पनपने से पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, समय रहते समन्वित कार्रवाई नहीं की गई तो यह खतरा और बढ़ सकता है।
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