ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिका खुद ही अपनी रणनीति के जाल में उलझता नजर आ रहा है। ईरान ने एक के बाद एक ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे अमेरिका की सैन्य और आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ गया है।
‘ढाई चाल’ में फंसा अमेरिका, ईरान की रणनीति भारी
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान ने इस युद्ध में ‘ढाई चाल’ की रणनीति अपनाई है, जिसने अमेरिका को कई मोर्चों पर घेर लिया है। सबसे बड़ा कदम रहा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। ईरान ने इस रास्ते को दुश्मन देशों के लिए बंद कर दिया, जबकि भारत, रूस और चीन जैसे मित्र देशों को छूट दी। इसके अलावा ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूली की घोषणा भी कर दी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
खाड़ी देशों में बढ़ी बेचैनी, सुरक्षा को लेकर चिंता
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। यूएई, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत जैसे देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता गहराई है। इन देशों को आशंका है कि ईरान सीधे तौर पर उनके औद्योगिक और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है। खासतौर पर एल्युमिनियम प्लांट और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर खतरे में हैं। ऊर्जा संकट का खतरा भी मंडरा रहा है, जबकि कई खाड़ी देश अब इस युद्ध में खुलकर अमेरिका का साथ देने से बचते नजर आ रहे हैं।
एयरबेस पर हमले, अमेरिका को सैन्य नुकसान
ईरान ने इस संघर्ष में अमेरिका को सीधे निशाना बनाते हुए उसके विदेशी एयरबेस पर हमले तेज कर दिए हैं। यूएई और कतर में स्थित अमेरिकी एयरबेस—जैसे अल धफरा और अल उदीद—पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। इन हमलों में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जबकि एक अहम निगरानी विमान E-3 AWACS के नष्ट होने की खबर भी सामने आई है। इन हमलों ने अमेरिका की सैन्य क्षमता को झटका दिया है।
युद्ध का बढ़ता खर्च, घटता समर्थन
इस युद्ध का आर्थिक असर भी अमेरिका पर साफ दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका रोजाना करीब 1 अरब डॉलर इस युद्ध पर खर्च कर रहा है। वहीं, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन जैसे नाटो सहयोगियों ने भी सीधे समर्थन से दूरी बना ली है। इससे अमेरिका की स्थिति और कमजोर होती दिख रही है। मिसाइल भंडार में कमी और बढ़ता खर्च, दोनों ही अमेरिका के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।
ट्रंप का बयान: ‘ऑपरेशन जारी रहेगा’
2 अप्रैल को दिए गए अपने संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि युद्ध अभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” जारी रखने की बात दोहराई और ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अभियान जारी रखेगा और आने वाले समय में और कड़े हमले किए जा सकते हैं।
ईरान की रणनीतिक चालों और लगातार हमलों ने इस संघर्ष को और जटिल बना दिया है। एक तरफ जहां अमेरिका आर्थिक और सैन्य दबाव में है, वहीं ईरान पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा। आने वाले हफ्तों में यह टकराव और गंभीर रूप ले सकता है, जिससे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
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