महाराष्ट्र की सियासत में मंगलवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं हुए। यह कदम ऐसे समय आया है, जब महायुति सरकार में मतभेद की खबरें पहले से ही चर्चा में थीं। शिवसेना नेताओं ने इसे मामूली घटना बताते हुए कहा कि शिंदे श्रीनगर में अपना प्रवास बढ़ाने के कारण उपस्थित नहीं हो पाए। वह वहां पार्टी पदाधिकारी चंद्रहार पाटिल द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में शामिल होने गए थे।
ध्वजारोहण विवाद ने बढ़ाया तनाव
जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस पर रायगढ़ और नासिक में शिवसेना उम्मीदवारों को दरकिनार कर राकांपा और भाजपा मंत्रियों से राष्ट्रीय ध्वज फहराने का फैसला सरकार ने लिया। इस निर्णय ने शिवसेना खेमे में असंतोष को और बढ़ा दिया। ध्वजारोहण विवाद के अगले ही दिन शिंदे और वरिष्ठ विधायक भरत गोगावाले कैबिनेट बैठक में अनुपस्थित रहे।
दिल्ली दौरे और पुराने मतभेद
शिंदे हाल के महीनों में तीन बार दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिल चुके हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार, नवंबर में महायुति सरकार बनने के बाद से शिंदे कम से कम तीन बार सरकारी बैठकों से दूर रहे हैं। फरवरी में भी उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता वाली दो बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था। उस समय उनके नाराज होने के कारणों में मुख्यमंत्री पद से वंचित रहना भी शामिल था।
आपसी रिश्तों में खटास?
सूत्रों का कहना है कि फडणवीस शिवसेना नेताओं से जुड़े कई विवादों से असहज हैं, जबकि शिंदे को लगता है कि उनकी पार्टी के नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है या जांच एजेंसियों द्वारा टारगेट किया जा रहा है। इस ताजा अनुपस्थिति ने महायुति गठबंधन में दरार की अटकलों को और हवा दे दी है।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस
