बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में लंबे समय से अटके महापौर चुनाव को लेकर बड़ी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, 30 जनवरी को बीएमसी महापौर चुनाव कराए जाने की प्रबल संभावना है। बीएमसी आयुक्त जल्द ही इसका औपचारिक कार्यक्रम घोषित कर सकते हैं।
BJP को मिल सकता है नया महापौर
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का महापौर बनना लगभग तय माना जा रहा है। खास बात यह है कि भाजपा शिंदे गुट की शिवसेना को महापौर पद की पेशकश नहीं करेगी, जिससे महायुति के भीतर शक्ति संतुलन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लॉटरी से तय होगी श्रेणी, फिर मतदान
महापौर चुनाव प्रक्रिया के तहत पहले महापौर पद की श्रेणी तय करने के लिए लॉटरी निकाली जाएगी। इसके बाद महापौर और उप महापौर—दोनों पदों के लिए मतदान कराया जाएगा।
महायुति के पास स्पष्ट बहुमत
बीएमसी में भाजपा और शिंदे गुट की संयुक्त ताकत 118 पार्षदों की है, जबकि बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है। महायुति में शामिल अजीत पवार की एनसीपी के 3 पार्षदों के समर्थन से यह संख्या 121 तक पहुंच जाती है, जिससे गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत हो जाती है।
विपक्ष बहुमत से काफी दूर
विपक्षी खेमे की बात करें तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 65 सीटें मिली हैं। उनके सहयोगी एमएनएस को सिर्फ 6 सीटें ही मिल पाईं। कांग्रेस को 24 और शरद पवार की एनसीपी (SP) को केवल 1 सीट मिली। कुल मिलाकर विपक्ष के पास सिर्फ 96 सीटें हैं, जो बहुमत से काफी कम हैं।
MVA में मतभेद पड़े भारी
महा विकास अघाड़ी (MVA) के घटक दलों—शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (SP)—ने बीएमसी चुनाव अलग-अलग लड़ने का फैसला किया। शिवसेना (UBT) ने कांग्रेस को एमएनएस के साथ गठबंधन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसे ठुकरा दिया गया। इसी कारण विपक्ष एकजुट मोर्चा नहीं बना सका और इसका सीधा फायदा महायुति को मिला।
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