केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। इस बजट का मूल उद्देश्य आर्थिक स्थिरता बनाए रखते हुए विकास को गति देना रहा। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाकर विकास को प्राथमिकता दी, वहीं राजस्व बढ़ाने के लिए कुछ सख्त फैसले भी लिए।
टैक्सपेयर्स को सीधी राहत क्यों नहीं?
इस बार सरकार ने टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं किया, लेकिन इनकम टैक्स नियमों को सरल बनाकर करदाताओं को राहत देने की कोशिश की। रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा बढ़ाई गई है, पेनल्टी कम की गई है और तकनीकी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। इससे टैक्सपेयर्स का मानसिक दबाव कम होने और सिस्टम पर भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।
विदेशी निवेश के लिए क्या बदला?
बजट में FDI नियमों में ढील देकर भारत को निवेश के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश की गई है। निवेश सीमा बढ़ाने और टैक्स प्रावधानों को आसान करने से लंबी अवधि में पूंजी निवेश और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
आम उपभोक्ताओं को कितनी राहत?
सरकार ने 17 जीवनरक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया है। इसमें कैंसर की दवाएं और दुर्लभ बीमारियों के लिए विशेष आहार शामिल हैं। इससे इलाज सस्ता हो सकता है। इसके अलावा माइक्रोवेव ओवन और कुछ कैपिटल गुड्स पर ड्यूटी घटाई गई है, जिससे कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है।
उद्योग और निर्यात पर असर
कपड़ा, लेदर और समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। ये श्रम-प्रधान सेक्टर हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, शेयर बायबैक पर टैक्स लगाने का फैसला निवेशकों के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब इसे कैपिटल गेन माना जाएगा। कुल मिलाकर Budget 2026-27 विकास और राजस्व संतुलन की कोशिश करता दिखता है, लेकिन आम आदमी को मिली सीधी राहत सीमित नजर आती है।
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