जी, हां आप ने सही पढ़ा पाकिस्तान के आतंकियों का पक्ष लेने वाला चीन खुद अब आतंकियों से डरा हुआ है। चीन ने आईएसआईएस खुरासान को खत्म करने के लिए तालिबान की ताकत बढ़ाने का फैसला लिया है। तालिबान को चीन अब घातक हथियार दे रहा है ताकी वो आईएसआईएस खुरासान के आतंकियों का सफाया कर सरे।
चीन को डर है कि आतंकियों की वजह से पाकिस्तान और अफगानिस्तान में चाइनीज प्रोजेक्ट नाकाम हो सकते हैं। चीन ने तालिबान की सरकार को मजबूत बनाने के लिए हथियारों की सप्लाई शुरू की है। चीन का मकसद तालिबान को इतना ताकतवर बनाना है कि वो आईएसआईएस खुरासान को कुचल सके।
वैसे तो तालिबान के पास हथियारों की कमी नहीं है। लेकिन चीन अब उसे ऐसे हथियार दे रहा है जिसे तालिबानी दूर रहकर भी आतंक के अड्डों को तबाह कर सकते हैं। अफगानिस्तान में अपने नागरिकों की रक्षा के नाम पर चीन तालिबान को अत्याधुनिक हथियार दे रहा है।
चीन के बीआरआई प्राजेकेट की सफलता पर आंच आ सकती है
‘द जेम्सटन फाउंडेशन’ ‘की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। अफगानिस्तान में जारी हिंसा और अस्थिरता से चीन को इकनॉमिक कारिडोर (सीपीईसी) समेत अपने हितों पर खतरा मंडरा रहा है। उसे लगता है कि यह स्थिति रही तो उसके महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट ऐंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) की सफलता पर आंच आ सकती है।
अफगानिस्तान में इस वक्त तालिबान को चुनौती देने वाला संगठन केवल आईएसआईएस के है। जो हालिया दिनों में कई हमलों को अंजाम दे चुका है। चीन आतंक के इस नए गुट का खात्मा चाहता है। काबुल में आईएसआईएस के ने एक होटल पर हमला किया था।
हमले में चीन के पांच नागरिक जख्मी हो गए थे। होटल का मालिक भी चीन का बिजनेसमैन है। इसी अटैक के बाद आईएसआईएस के चीन के टारगेट पर आ गया है। वैसे चीन के इस गुट पर पैनी निगाह की वजह और भी है। आईएसआईएस के उइगर विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहा है। उइगर विद्रोही आईएसआईएस के में शामिल भी हो रहे हैं।
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