मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में दूषित कफ सिरप पीने से कम से कम 14 बच्चों की मौत के मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। यह याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी ने दाखिल की है। उन्होंने पूरे देश में सभी दूषित कफ सिरप बैचों पर प्रतिबंध, उन्हें वापस मंगाने और सभी सिरप-आधारित दवाओं की अनिवार्य जांच की मांग की है।
पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग
तिवारी ने याचिका में कहा कि जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए। उन्होंने अन्य राज्यों में हुई ऐसी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
मुआवज़ा और फार्माकोविजिलेंस पोर्टल की मांग
याचिका में शोक संतप्त परिवारों को मुआवज़ा देने और राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस पोर्टल बनाने की मांग की गई है, ताकि दवा सुरक्षा अलर्ट की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग हो सके। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा गया है कि बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन का अधिकार सुनिश्चित करता है कि उपचार के लिए बनी कोई भी दवा मौत का कारण न बने।
डीईजी से हुई बच्चों की मौत
यह मामला उस त्रासदी से जुड़ा है जिसमें कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 15 साल से कम उम्र के 14 बच्चों की मौत हो गई थी। राज्य सरकार की जांच में पाया गया कि यह सिरप तमिलनाडु की श्रीसन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित था और इसमें डायएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) मिला था — जो एक ज़हरीला औद्योगिक रसायन है और दवाओं में इसके उपयोग पर प्रतिबंध है।
केंद्र और सीडीएससीओ पर लापरवाही के आरोप
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, सिरप पीने के बाद बच्चों में गुर्दे की विफलता के लक्षण पाए गए। कुछ ही दिनों में मौत का आंकड़ा 14 तक पहुंच गया। बाद में महाराष्ट्र के नागपुर से भी ऐसे मामले सामने आए। याचिका में केंद्र सरकार और सीडीएससीओ की निष्क्रियता पर सवाल उठाया गया है कि दूषित पदार्थों की पुष्टि के बावजूद कोई चेतावनी या प्रतिबंध जारी नहीं किया गया।
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