भारत के मिडिल क्लास प्रोफेशनल्स और क्रिएटिव टैलेंट के लिए दुबई ने एक नई राह खोल दी है। यूएई ने हाल ही में अपनी गोल्डन वीजा योजना का दायरा बढ़ाते हुए मिडिल क्लास पर फोकस किया है। करीब 23 लाख रुपये की फीस देकर भारत के शिक्षक, यूट्यूबर, वैज्ञानिक, नर्स, कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव और ई-स्पोर्ट्स प्रोफेशनल अब इस वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कैसे काम करता है नया सिस्टम?
यूएई सरकार का कहना है कि यह कोई “पे-टु-स्टे” स्कीम नहीं है। इसके लिए स्क्रीनिंग और नॉमिनेशन जरूरी है। मान्यता प्राप्त कंसल्टेंसी के जरिए आवेदन भेजा जाता है। 23 लाख रुपये की फीस तभी ली जाती है जब आवेदक स्क्रीनिंग पास कर ले। इस वीजा के लिए यूएई जाकर आवेदन करने की जरूरत नहीं है।
पुराने वीजा से कैसे अलग?
पहले गोल्डन वीजा के लिए करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीदना या बड़ा इनवेस्टमेंट करना पड़ता था। लेकिन इस नई योजना में टैलेंट और योगदान को प्राथमिकता दी गई है। अब मिडिल क्लास पेशेवर भी लंबे समय तक काम और परिवार के साथ रह सकते हैं।
क्या भारत को होगा नुकसान?
सोशल मीडिया पर इस योजना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इसे टैक्स फ्री और लग्जरी जीवन का मौका मान रहे हैं, तो कुछ इसे भारत के लिए ब्रेन ड्रेन का खतरा बता रहे हैं।
पांच हजार स्लॉट और भारत-बांग्लादेश पर फोकस
इस पायलट प्रोजेक्ट में केवल पांच हजार स्लॉट ही रखे गए हैं और इसे फिलहाल भारत और बांग्लादेश में लागू किया गया है। साफ है कि दुबई की नजर “बेस्ट ऑफ बेस्ट” मिडिल क्लास प्रोफेशनल्स पर है।
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