Sunday, March 29, 2026
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होली 2026 पर ग्रहण और भद्रा का साया, जानिए होलिका दहन का सही समय

मार्च 2026 की शुरुआत में पड़ने वाले व्रत और त्योहारों को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। खासतौर पर फाल्गुन पूर्णिमा, होलिका दहन और होली 2026 पर पड़ने वाले खग्रास चंद्रग्रहण और भद्रा काल ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर होली के रंगों को लेकर उत्साह है, तो दूसरी ओर ग्रहण और भद्रा के कारण शुभ-अशुभ को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


होली का धार्मिक महत्व और परंपरा

होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि यह आस्था, उल्लास और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। देश के अलग-अलग हिस्सों में होली अपने-अपने रीति-रिवाजों से मनाई जाती है। मान्यता के अनुसार, काशी क्षेत्र में होली फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है, जबकि काशी के बाहर कई स्थानों पर पूर्णिमा युक्त प्रतिपदा को रंगोत्सव या होलिकोत्सव मनाने की परंपरा है।


होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, होलिका दहन का शुभ समय इस प्रकार रहेगा:

  • तिथि: 02 मार्च 2026, सोमवार
  • शुभ मुहूर्त: रात 11:43 बजे से सुबह 04:56 बजे तक
    (03 मार्च 2026) धार्मिक मान्यताओं में होलिका दहन के लिए रात्रि काल को सबसे उत्तम माना गया है, बशर्ते उस समय भद्रा न हो।

कब है अशुभ और कब शुभ

भद्रा की शुरुआत: 02 मार्च 2026, सोमवार – शाम 04:19 बजे से
भद्रा की समाप्ति: 03 मार्च 2026, मंगलवार – सुबह 04:56 बजे तक

ज्योतिष के अनुसार, जब भद्रा सिंह राशि में होती है, तो उसका वास पृथ्वी लोक में माना जाता है, जिसे अशुभ कहा गया है।

  • भद्रा मुख (अशुभ): 02 मार्च 2026, रात 11:43 बजे तक इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना गया है।
  • भद्रा पुच्छ (शुभ): 02 मार्च 2026, रात 11:43 बजे से 03 मार्च 2026, सुबह 04:56 बजे तक इसी समय होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है।

काशी में होली कब मनाई जाएगी?

  • काशी में होली: 03 मार्च 2026
  • काशी के बाहर: 04 मार्च 2026

होलिका दहन की पौराणिक कथा

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। कथा के अनुसार, राक्षस राजा हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से क्रोधित था। उसने अपनी बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था, को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई। इसी स्मृति में हर वर्ष होली से पहले होलिका दहन किया जाता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश माना जाता है।

 

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