जी, हां आप ने सही पढ़ा उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर फल-फूल है नकली दवाओं का कारोबार और शासन-प्रसाशन मूक दर्शक मना हुआ है। शासन-प्रसाशन की इस लापरवाही का नतीजा आम जनता भुगतना पड़ रहा है।
नकली दवाओं का यह खेल दशकों से चल रहा है। धीरे-धीरे यह गोरखधंधा अब मार्डन भी होता जा रहा है। आज कल ऑनलाइन दवाईयां मंगाने का दौर चल रहा है इस दौर में भी गोरखधंधे बाज ब्रांडेड कंपनियों के रैपर पर नकली दवाई आम लोगों को सप्लाई कर रहे है।
यह कार्रवाई हमेशा होनी चाहिए
शासन-प्रशासन कभी-कभी अपनी नींद से उठती है तो कार्रवाई भी करती है अभी कुछ महीने पहले 05 JUNE, 2022 को उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स ने नकली दवा बनाने वाली कंपनियों पर छापेमारी की थी। इस दौरान एसटीएफ ने करीब 15 लाख नकली टैबलेट्स बरामद किए, जिसकी बाजार में कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। STF को इन दवा बनाने वाली कंपनियों में कई दूसरी नामी कंपनियों की दवाइयों के रैपर भी मिले हैं।
पुलिस द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि इन नकली दवाओं को ब्रांडेड दवाइयों के रैपर में डालकर ऑनलाइन ऑर्डर में बेचा जाता था। एसटीएफ को खुफिया सूत्रों से इसकी जानकारी मिली थी, जिसके बाद रविवार को तड़के 6:00 बजे से ही हरिद्वार और यूपी के सहारनपुर जिले में इन कंपनियों पर कार्रवाई शुरू कर दी।
इससे पहले 9 फरवरी 2022 को उत्तराखंड के उधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar Uttarakhand) की कुंडा थाना पुलिस ने एक मकान पर छापा मारकर नकली दवाइयों की फैक्ट्री का पता लगाया था। पुलिस ने मौके से करोड़ों की दवाइयां ओर रॉ मैटेरियल बरामद किया था। वहीं इस दौरान 10 लोगों को हिरासत में लिया गया था। यह जानकारी तत्कानी एसएसपी वरिंदरज सिंह ने दी थी।
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