माहिसागर/गुजरात। गुजरात के महिसागर जिले में महिसागर नदी पर बना गंभीरा पुल हाल ही में हुए हादसे के बाद सवालों के घेरे में है। इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने तत्काल जांच के आदेश दिए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पुल सही रख-रखाव के अभाव और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया? मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने तत्काल जांच के आदेश जारी करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पुल के रखरखाव में लापरवाही के आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंभीरा पुल की हालत पिछले कई महीनों से खराब थी। पुल पर दरारें और जंग लगे हिस्से साफ नजर आते थे। कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने केवल दिखावे की मरम्मत कराई। लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते सही मरम्मत होती तो यह हादसा नहीं होता।
भ्रष्टाचार ने बढ़ाई समस्या? घटिया निर्माण पर सवाल
पुल हादसे के बाद निर्माण और रखरखाव कार्यों में भ्रष्टाचार की ओर भी उंगलियां उठ रही हैं। कुछ स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुल के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ और समय-समय पर रखरखाव के लिए जारी बजट का दुरुपयोग किया गया।
जांच और जवाबदेही क्यों जरूरी है?
मुख्यमंत्री ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
भविष्य के लिए सबक: पुलों का समय पर निरीक्षण और सुधार
गंभीरा पुल हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बुनियादी ढांचे की अनदेखी भारी पड़ सकती है। सरकार को चाहिए कि सभी पुराने पुलों और संरचनाओं का तकनीकी निरीक्षण कराए और जहां ज़रूरी हो वहां सुधार कार्य कराए। साथ ही, निर्माण और रखरखाव में ईमानदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
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