पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान को लेकर पिछले तीन हफ्तों से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। कोर्ट के आदेश अनुरूप परिवार और वकीलों को नियमित मुलाकात की अनुमति मिलती थी, लेकिन नवंबर के पहले सप्ताह में अंतिम मुलाकात के बाद से जेल प्रशासन ने अचानक संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया। इमरान की बहनों और वकीलों को 22 दिनों से प्रवेश न मिलने के बाद उनके जिंदा होने पर सवाल उठने लगे हैं।
अफगान मीडिया की पोस्ट से फैली सनसनी
26 नवंबर को अफगानिस्तान टाइम्स ने दावा किया कि रावलपिंडी की अडियाला जेल में इमरान खान की हत्या कर दी गई है। यह पोस्ट सामने आते ही पाकिस्तान में कोहराम मच गया। पीटीआई कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जेल के बाहर जुट गए। सरकार ने हालांकि इस दावे को अफवाह बताया, लेकिन प्रशासन की चुप्पी और मुलाकातों पर लगे प्रतिबंध ने संदेह और गहरा कर दिया है।
परिवार का धरना और पुलिस का लाठीचार्ज
इमरान खान की बहनें—नरीन, अलीमा और उजमा खान—जेल के बाहर धरने पर बैठ गईं। उनका कहना है कि तीन सप्ताह से उन्हें अपने भाई की कोई खबर नहीं मिली। इसी दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। परिवार ने पंजाब पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच की मांग भी की है।
सरकार की खामोशी और जारी थ्योरियाँ
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इमरान खान को रातों-रात किसी दूसरी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं दूसरी थ्योरी कहती है कि सेना जानबूझकर संपर्क बंद करके जनता की प्रतिक्रिया माप रही है। यह भी आरोप हैं कि फौज और इमरान की पुरानी तनातनी इस स्थिति की बड़ी वजह है।
पाकिस्तानी जेलों में बर्बरता का इतिहास
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार पाकिस्तानी जेलों में अत्यधिक भीड़, अत्याचार और भ्रष्टाचार आम बात है। कई कैदियों ने स्वीकार किया है कि उन्हें नियमित रूप से प्रताड़ित किया जाता है और पैसे वसूले जाते हैं। ऐसे माहौल में इमरान खान की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
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