फिलीपींस की राजधानी मनीला में भारत ने ऐसा कूटनीतिक संदेश दिया, जिसने भारत-चीन संबंधों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के साथ सीमा विवाद और व्यापारिक असंतुलन जैसे अहम मुद्दों पर भारत का रुख पूरी स्पष्टता के साथ सामने रखा।
मनीला में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की मुलाकात के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कहा कि जब तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बहाल नहीं होती, तब तक दोनों देशों के संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी दोहराया कि अक्टूबर 2024 में हुए समझौतों का पूरी तरह सम्मान किया जाना चाहिए। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि सीमा पर शांति दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी शर्त है।
फिलीपींस से चीन को रणनीतिक संदेश
दक्षिण चीन सागर में चीन की विस्तारवादी नीतियों का लगातार विरोध करने वाले फिलीपींस की राजधानी मनीला में भारत की मौजूदगी को भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। इस मंच से भारत ने यह स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन को लेकर उसकी नीति पहले की तरह दृढ़ बनी हुई है।
112.16 अरब डॉलर के व्यापार घाटे पर भारत की चिंता
बैठक के दौरान भारत-चीन व्यापार घाटे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। भारत ने इस असंतुलन पर चिंता जताते हुए कहा कि व्यापारिक संबंध निष्पक्ष और संतुलित होने चाहिए।
भारतीय उत्पादों को निष्पक्ष बाजार पहुंच की मांग
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के सामने भारतीय उत्पादों के लिए चीनी बाजार में निष्पक्ष और समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग रखी। उन्होंने यह भी कहा कि महत्वपूर्ण तकनीक, मशीनरी और रेयर अर्थ एलिमेंट जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को प्रभावित करना स्वीकार्य नहीं है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सप्लाई चेन में किसी भी प्रकार की बाधा या हेरफेर उचित नहीं मानी जा सकती।
समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भारत का रुख
भारत ने बैठक के दौरान समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान पर भी जोर दिया। मनीला के मंच से यह संदेश दिया गया कि वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्गों से जुड़े नियमों का पालन सभी देशों के लिए समान रूप से आवश्यक है।
भारत ने दोहराया अपना स्पष्ट रुख
मनीला में हुई इस बैठक के जरिए भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा, व्यापारिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय नियमों जैसे मुद्दों पर उसकी नीति पहले की तरह दृढ़ बनी रहेगी। भारत ने संकेत दिया कि भविष्य में भी वह अपने राष्ट्रीय हितों और स्थापित समझौतों के आधार पर ही चीन के साथ संबंधों को आगे बढ़ाएगा।
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