भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमें अगले महीने होने वाले FIH वर्ल्ड कप में पहली बार पारंपरिक नीली जर्सी के बजाय केसरिया रंग की किट पहनकर मैदान में उतरेंगी। इस बदलाव के बाद खेल जगत में बहस तेज हो गई है। पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जबकि हॉकी इंडिया ने इसके पीछे की वजह भी स्पष्ट कर दी है।
FIH वर्ल्ड कप में नई केसरिया जर्सी में दिखेंगी भारतीय टीमें
नीदरलैंड और बेल्जियम में अगले महीने आयोजित होने वाले FIH पुरुष और महिला हॉकी वर्ल्ड कप के लिए हॉकी इंडिया ने भारतीय टीमों की नई जर्सी लॉन्च की है। संगठन ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नई किट साझा करते हुए कहा कि इसका डिज़ाइन और रंग भारत के गौरव और उसकी प्रेरणादायक कहानी को दर्शाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
विरेन रास्किन्हा ने फैसले पर जताई आपत्ति
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने जर्सी के रंग में बदलाव को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी के लिए कई सकारात्मक कार्य किए हैं, लेकिन यह फैसला निराशाजनक है। रास्किन्हा के अनुसार भारतीय हॉकी की पहचान वर्षों से नीली जर्सी रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी और उनका मानना है कि प्रशंसक भी भारतीय टीम को उसी रंग में देखना पसंद करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केसरिया रंग चुनने के पीछे क्या तर्क है।
भारतीय हॉकी में विरेन रास्किन्हा का अहम योगदान
सीनियर टीम की कप्तानी संभालने से पहले विरेन रास्किन्हा 2001 FIH जूनियर वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के महत्वपूर्ण सदस्य रहे थे। उन्होंने 2004 एथेंस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया, 2006 पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया और चैंपियंस ट्रॉफी में भी खेले। अपने दौर के प्रमुख मिडफील्डरों में उनकी गिनती की जाती है।
हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने दी सफाई
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप कुमार तिर्की ने गुरुवार को जर्सी के रंग बदलने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय खिलाड़ियों, कोचों, सपोर्ट स्टाफ और टीम कप्तानों के सुझाव के बाद लिया गया। उन्होंने बताया कि नई जर्सी FIH पुरुष और महिला हॉकी वर्ल्ड कप से पहले लॉन्च की गई है। ये टूर्नामेंट क्रमशः 14 और 15 अगस्त से नीदरलैंड और बेल्जियम में शुरू होंगे।
पहले भी बदला जा चुका है जर्सी का रंग
दिलीप तिर्की ने कहा कि भारतीय टीम लंबे समय से नीली जर्सी पहनती रही है और उन्होंने स्वयं भी उसी रंग की जर्सी में कई महत्वपूर्ण मुकाबले खेले हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब टीम की जर्सी का रंग बदला गया हो। उन्होंने बताया कि 2014 में भारतीय टीम ने पीले रंग की जर्सी पहनी थी, जबकि 2018 में हल्के नीले रंग का भी उपयोग किया गया था। इस बार का बदलाव भी टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों के सुझाव के आधार पर किया गया है।
नीले टर्फ पर दृश्यता बनी बदलाव की मुख्य वजह
हॉकी इंडिया अध्यक्ष ने बताया कि खिलाड़ियों और कोचों ने महसूस किया कि नीले रंग के हॉकी टर्फ पर नीली जर्सी पहनने से खिलाड़ियों की पहचान करना कठिन हो जाता है। मैच के दौरान दृश्यता प्रभावित होने की शिकायत लगातार सामने आ रही थी। उन्होंने कहा कि इसी कारण टीम की ओर से दो रंग—पीला और केसरिया—सुझाए गए थे। विचार-विमर्श के बाद अंततः केसरिया रंग को चुना गया, क्योंकि यह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का भी एक महत्वपूर्ण रंग है।
जर्सी विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग
भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर विवाद लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। पूर्व कप्तान और ओलंपियन विरेन रास्किन्हा ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस बदलाव की आलोचना की है। दूसरी ओर हॉकी इंडिया का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह खेल से जुड़ी व्यावहारिक जरूरतों और खिलाड़ियों की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
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