स्मार्टफोन की स्क्रीन को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर को लेकर सरकार नया नियम लागू करने की तैयारी में है। 1 अप्रैल 2027 से स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए तय भारतीय मानक IS 19348:2025 का पालन करना जरूरी होगा। इसके लिए BIS प्रमाणन की आवश्यकता होगी।
1. स्क्रीन प्रोटेक्टर को लेकर नया नियम
सरकार मोबाइल फोन के लिए इस्तेमाल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर को अनिवार्य BIS प्रमाणन वाली वस्तुओं की सूची में शामिल करने की तैयारी में है।
2. 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा मानक
नए नियम के तहत 1 अप्रैल 2027 से स्मार्टफोन के लिए बनाए जाने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर को भारतीय मानक IS 19348:2025 के अनुरूप होना होगा।
3. निर्माताओं और आयातकों पर असर
इस तारीख के बाद भारत में स्क्रीन प्रोटेक्टर बेचने के लिए निर्माताओं और आयातकों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।
4. कंपनियों को तैयारी का समय
सरकार ने कंपनियों को तैयारी के लिए करीब 7 महीने का समय दिया है। इस दौरान जरूरी परीक्षण और BIS से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
5. केवल फिटिंग ही मानक नहीं
नया मानक सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि स्क्रीन प्रोटेक्टर किसी मोबाइल मॉडल पर सही फिट होता है या नहीं।
6. ग्लास की गुणवत्ता भी शामिल
मानक में ग्लास की मोटाई, आकार, माप, मजबूती और गुणवत्ता से जुड़ी आवश्यकताएं तय की गई हैं।
7. अतिरिक्त परतों के लिए भी नियम
स्क्रीन प्रोटेक्टर में इस्तेमाल होने वाली अतिरिक्त परतों को भी तय मानकों के दायरे में शामिल किया गया है।
8. इन परतों पर भी लागू होगा मानक
एडहेसिव लेयर, एंटी-शैटर फिल्म, ऑलियोफोबिक कोटिंग, एंटी-ग्लेयर फिल्म, ब्लू-लाइट फिल्टर और प्राइवेसी फिल्म भी इसमें शामिल हैं।
9. ग्राहकों पर संभावित असर
आम ग्राहकों के लिए बाजार में उपलब्ध स्क्रीन प्रोटेक्टर की गुणवत्ता को लेकर एक तय मानक होगा। इससे बेहद खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों की बिक्री प्रभावित हो सकती है।
10. कीमत और विकल्पों पर असर संभव
BIS प्रक्रिया में टेस्टिंग और अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसका खर्च कुछ स्क्रीन प्रोटेक्टर की कीमत में दिखाई दे सकता है और बाजार में उपलब्ध विकल्पों पर भी असर पड़ सकता है।
मोबाइल यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर?
नए नियम के बाद स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए गुणवत्ता से जुड़े निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। इससे बाजार में उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर एक तय व्यवस्था बन सकती है। हालांकि, कंपनियों को परीक्षण और BIS से संबंधित प्रक्रियाओं से गुजरना होगा, जिसका खर्च कुछ उत्पादों की कीमत में दिखाई दे सकता है।
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