पाकिस्तान में राजनीतिक और संवैधानिक संकट एक बार फिर गहरा गया है। देश के सुप्रीम कोर्ट से आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के खिलाफ बागी तेवर उभरकर सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जज—मंसूर अली शाह और अतहर मिनल्लाह—ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों जजों ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि आर्मी चीफ को कानूनी कार्रवाई से पूर्ण सुरक्षा देना और उन्हें डिफेंस चीफ के तौर पर स्थापित करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
जजों की इस कदम से विपक्षी दलों को भी केंद्र सरकार और सेना पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। पाकिस्तान में यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का प्रमुख केंद्र बन गया है।
27वें संविधान संशोधन से बढ़ी आर्मी चीफ की ताकतें
27वें संशोधन के तहत जनरल आसिम मुनीर अब तीनों सेनाओं के संयुक्त डिफेंस चीफ बन गए हैं। संशोधन के अनुसार उनके खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई या केस दर्ज नहीं किया जा सकेगा।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की कई शक्तियों को राष्ट्रपति के अधीन कर दिया गया है। एक नए “फेडरल कोर्ट ऑफ कंस्टीट्यूशनल केस (FCC)” को स्थापित करने की तैयारी है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के कई अधिकार सौंपे जाएंगे। चुनाव से जुड़ी सभी अपीलें भी अब एफसीसी में ही दाखिल होंगी।
यही नहीं, हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है, जिसका प्रभाव न्यायपालिका की स्वायत्तता पर दिख सकता है। इन प्रावधानों ने पाकिस्तान के राजनीतिक और न्यायिक ढांचे में उथल-पुथल मचा दी है।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ता असंतोष, और इस्तीफों की आशंका
सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में असंतोष और बढ़ सकता है। दो से तीन और जज भी जल्द इस्तीफा दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के कुल 16 जजों में से कई जज संशोधन को लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा मान रहे हैं।
उनका आरोप है कि इस संशोधन के माध्यम से सेना प्रमुख को असीमित शक्तियां देकर लोकतंत्र के अन्य स्तंभों—न्यायपालिका, संसद और कार्यपालिका—को कमजोर किया जा रहा है। लगातार बढ़ते विरोध से पाकिस्तान में संवैधानिक संकट और तीखा होने की आशंका है।
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