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क्या अब भारत के मुकाबले चीन के ज्यादा करीब हो रहा है रूस?

रूस और चीन ने अमेरिका के नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को चुनौती दी है और संभावना जताई जा रही है कि वे आगे भी इसे नेकस्ट लेवल पर ले जाने की तैयारी में हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस मास्को और वाशिंगटन के बीच अंतिम शेष परमाणु-हथियार संधि में अपनी भागीदारी को निलंबित करने का ऐलान किया है।

इधर वांग अपनी आठ दिन की यूरोप यात्रा के आखिरी मुकाम के तौर पर आज मास्को में होंगे। इतना ही नहीं चीन द्वारा रूस को हथियार की सप्लाई किए जाने के दावे भी किए जा रहे हैं। ऐसे में जानकारों का दावा है कि अगर चीन वर्तमान परिस्थिति में रूस को हथियारों की सप्लाई करता है तो रूस की करीबी चीन से और बढ़ जाएगी। ऐसे में ये भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या रूस अब भारत के मुकाबले चीन के ज्यादा करीब होता जा रहा है।

रूस को हथियारों की सप्लाई कर रहा चीन

जो बाइडेन प्रशासन के अधिकारियों ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा है कि अगर ये बात साबित हो गई कि चीन रूस को हथियार दे रहा है तो उससे दुनिया में तनाव काफी बढ़ जाएगा। उससे एक खतरनाक और अनिश्चित स्थिति बन जाएगी। बाइडेन की मौजूदगी में यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि अगर चीन ने रूस को हथियार दिए तो उससे तीसरे विश्व युद्ध की स्थिति बन जाएगी।

चीन के विदेश मंत्री जिन गांग ने को कहा कि उनका देश रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने में भूमिका निभाना चाहता है। यूक्रेन पर हमले में रूस को चीन का मजबूत राजनीतिक समर्थन प्राप्त है। गांग ने बीजिंग में एक सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि चीन इस बात को लेकर चिंतित है कि करीब एक साल से चल रहा युद्ध और बढ़ सकता है तथा नियंत्रण से बाहर हो सकता है। उन्होंने कहा कि चीन शांति वार्ता की अपील करता रहेगा तथा चाहेगा कि एक राजनीतिक समाधान निकालने के लिए चीन की समझदारी का लाभ उठाया जाए। रूस-यूक्रेन युद्ध के एक साल पूरे होने पर चीन एक ‘पीस प्लान’ जारी करेगा। इसके लिए वह फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन से भी बातचीत कर रहा है।

अमेरिका ने दी चेतावनी

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चीन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस का ‘घातक समर्थन’ जारी रखने को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि इसके अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर ‘गंभीर प्रभाव’ होंगे। अमेरिका के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ब्लिंकन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठतम विदेश नीति अधिकारी वांग यी के साथ म्यूनिख में करीब एक घंटे तक बातचीत हुई थी।

क्यों साथ आएं चीन और रूस

विश्व व्यवस्था में अमेरिकी प्रभुत्व को कमजोर करने में रूस और चीन की समान रुचि है, जिसका वे आकलन करते हैं कि यूक्रेन पर पश्चिमी देश एकजुट होकर साथ खड़े हैं। दोनों के बीच समझौता एक महत्वपूर्ण अंतर के साथ उनकी शीत युद्ध विरोधी पश्चिमी साझेदारी को दोहरा सकता है जिसमें मास्को के बजाय बीजिंग प्रमुख भागीदार होगा। यूरेशियन भूभाग पर हावी होने वाली दो महान निरंकुश शक्तियों के एक साथ निकट आने की संभावना है।

भारत के तटस्थ रूख से क्या पड़ेगा असर?

रूस-यूक्रेन जंग के बाद पश्चिमी देशों के निशाने पर मॉस्को आ गया और उस पर प्रतिबंधों की बारिश हो गई। लेकिन इससे इतरर भारत रूस के साथ अपने संबंधों और अपने हितों को ध्यान में रखकर रूस से कच्चा तेल समते तमाम चीजें खरीदता रहा। वहीं साल 2022 अमेरिका-चीन के लिए अब तक का सबसे बेहतर व्यापारिक साल रहा है। दोनों देशों के बीच इस साल 690 अरब डॉलर का व्यापार हुआ है। ऐसे में भारत व्यापार के मामले में कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है। लेकिन ये बात तो सच है कि रूस-चीन-ईरान का एक समूह बन रहा है जो पश्चिमी देशों के खिलाफ है। ऐसे में भारत के स्टैंड को लेकर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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