प्रोटेम स्पीकर क्या हैं?
प्रोटेम एक लैटिन मुहावरा है। इसका मतलब है ‘फिलहाल के लिए।’ इसलिए, प्रोटेम स्पीकर एक अस्थायी पद है। पिछली लोकसभा के अध्यक्ष नए सदन की बैठक से पहले अपना पद खाली कर देते हैं। प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। परंपरा के अनुसार यह पद सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को सौंपा जाता है। 2019 में, मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से सात बार के सांसद वीरेंद्र कुमार को प्रोटेम स्पीकर चुना गया था।
क्यों महत्वपूर्ण है प्रोटेम स्पीकर का पद?
प्रोटेम स्पीकर के पास कई जिम्मेदारियां होती हैं। इसमे शामिल है, लोकसभा की प्रथम बैठक की अध्यक्षता करना। नवनिर्वाचित सांसदों को पद की शपथ दिलाना। सरकार का बहुमत साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट कराया जा रहा है। स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के चुनाव के लिए मतदान कराना। सदन का नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद प्रोटेम स्पीकर का पद समाप्त हो जाता है।
स्पीकर पद के बारे में क्या?
अध्यक्ष निस्संदेह सदन का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। अध्यक्ष, सदन का संरक्षक, नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा चुना जाता है। सदन में कामकाज चलाने की जिम्मेदारी स्पीकर की होती है। वह व्यवस्था बनाए रखता है, बुरे व्यवहार के मामले में कार्यवाही को निलंबित कर सकता है और जब नियमों और प्रक्रियाओं की बात आती है तो अंतिम निर्णय भी लेता है।
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