Thursday, February 22, 2024
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नवरात्रि के 8वें दिन कन्या पूजन का है विशेष महत्व, ऐसे करें महागौरी की पूजा

नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवीं शक्ति महागौरी की पूजा की जाती है। Maa Mahagauri का अत्यंत गौर वर्ण है। इसलिए इनको Mahagauri के नाम से जाना जाता है। मान्यता के मुताबिक महागौरी ने अपनी कठिन तपस्या से गौर वर्ण प्राप्त किया था। तभी से मां को धन ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी त्रैलोक्य पूज्य मंगला, उज्जवला स्वरूपा Mahagauri, शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली महागौरी का नाम दिया गया।

पूजा शुभ मुहूर्त और शुभ योग

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरूआत 21 अक्तूबर को रात 09:53 मिनट से हुई। वहीं 22 अक्तूबर की शाम 07:58 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, आज यानी की 22 अक्तूबर को अष्टमी तिथि मनाई जा रही है। अष्टमी तिथि पर धृति योग के साथ सर्वार्थसिद्धि योग भी बन रहा है। सुबह 06:30 मिनट से शाम 06:44 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। आज कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।

Mahagauri का स्वरूप

श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

मां दुर्गा की आठवीं शक्ति मां महागौरी हैं। इनका वर्ण अत्यंत गौर है और मां ने वस्त्र व आभूषण भी सफेद धारण किए हैं। मां महागौरी की चार भुजाएं हैं और इनका वाहन बैल है। मां अपने हाथों में त्रिशूल, अभय मुद्रा, डमरू और वर मुद्रा धारण किए हैं। महागौरी का स्वभाव अत्यंत शांत है। मां महागौरी की आयु 8 वर्ष मानी जाती है।

पूजन का महत्व

मान्यता के अनुसार, Maa Mahagauri की पूजा करने से सभी ग्रहदोष दूर होते हैं। Mahagauri का ध्यान व पूजा करने से दांपत्य सुख, व्यापार, धन और सुख-समृद्धि बढ़ती है। मां की पूजा-अर्चना से व्यक्ति को अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। यह अपने भक्तों के कष्टों को जल्द ही दूर कर देती हैं।

मां महागौरी की उपासना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। मां का यह स्वरूप वृतियों को सत्य की ओर प्रेरित करके असत्य का नाश करती हैं। भक्तों के लिए मां दुर्गा का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का है। इसलिए अष्टमी तिथि को कन्या भोजन कराने का विधान है। मां महागौरी धन, वैभव, अन्न-धन और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती है।

पूजन विधि

अष्टमी तिथि को सुबह स्नान आदि कर महागौरी की पूजा में श्वेत, लाल या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद सबसे पहले कलश पूजन और उसके मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। महागौरी को रोली, मौली, कुमकुम, चंदन, अक्षत, मोगरे का फूल अर्पित करें।

साथ ही मां के सिद्ध मंत्र ‘श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:’ का जाप करें। मां को उनका प्रिय भोग हलवा-पूरी, चना और नारियल चढ़ाएं। फिर 9 कन्याओं का पूजन करें और भोजन कराएं। घर की छत पर लाल रंग की ध्वजा लगाने से सुख-समृ्द्धि बढ़ती है।

Maa Mahagauri का मंत्र

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

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